जयराम ठाकुर ने राहुल गांधी पर दी कड़ी प्रतिक्रिया, कहा – ‘उनकी ही पार्टी के नेता उन्हें गंभीरता से नहीं लेते’

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    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के नेता जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि आम जनता को बुनियादी चिकित्सा सुविधा तक मिलना एक कठिन चुनौती बन गई है। मटौर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के महज दावों को जमीनी हकीकत से अलग बताया।

    जयराम ठाकुर ने टांडा मेडिकल कॉलेज के हालात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई आवश्यक विभाग बंद पड़े हैं, जिसकी वजह से मरीजों को इलाज के अभाव में वापस लौटना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हालात सरकार की प्राथमिकताओं पर गहरी संदेह की स्थिति पैदा करते हैं और जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं।

    टांडा मेडिकल कॉलेज की खराब स्थिति

    उन्होंने विशेष रूप से टांडा मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी जैसे अहम विभाग की ओपीडी की बंदी को लेकर चिंता जताई। दूर-दराज से आए गंभीर मरीज बिना जांच और उचित इलाज के लौट जाने की परिस्थिति से स्वास्थ्य व्यवस्था की दयनीय स्थिति उजागर होती है। जयराम ठाकुर ने सरकार की योजनाओं और बड़े-बड़े परियोजनाओं में होने वाले खर्च के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि योजना और धरातल पर काम करने के बीच एक बड़ी खाई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर करती है।

    राहुल गांधी पर जयराम ठाकुर का बड़ा बयान

    सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों पर भी जयराम ठाकुर ने कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी हालात पर चर्चा की। उन्होंने कांग्रेस के कांगड़ा मंथन शिविर और राहुल गांधी के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के नेता राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेते। जयराम ठाकुर के अनुसार, मंथन शिविर में भी कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच असंतोष साफ देखा गया। उन्होंने राहुल गांधी के दौरे को भी औपचारिकता करार दिया और कहा कि इससे कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिली। उन्होंने कांग्रेस के व्यवस्था सुधार के नारे को खोखला बताते हुए यह भी कहा कि प्रदेश में विकास की गति पिछले कुछ वर्षों में धीमी हो गई है।

    जयराम ठाकुर के इन बयानों ने राजनीति में नए सियासी बहस की शुरुआत कर दी है। प्रदेश में स्वास्थ्य तथा राजनीतिक नेतृत्व की गुणवत्ता पर उठे सवाल नए चुनावी रण को भी प्रभावित कर सकते हैं। आम जनता के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा और पारदर्शी राजनीतिक नेतृत्व की उम्मीद के बीच यह बहस जारी रहेगी।

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