भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीतिक गलियारे में शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की गतिविधियों ने चर्चा का बाजार गर्म कर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई उनकी मुलाकात और बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से बंद कमरे में हुई बातचीत ने राजनीतिक समीकरण बदलने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
दिन की शुरुआत मुख्यमंत्री निवास से हुई जहां दिग्विजय सिंह ने किसान हितों से जुड़े मुद्दे उठाए। खासकर गेहूं खरीदी प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई और मुख्यमंत्री को किसानों की परेशानियों से अवगत कराया। उन्होंने समय रहते उचित उपाय करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया ताकि खरीदी की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिग्विजय सिंह के सुझावों को सराहा और बताया कि वर्तमान खरीदी प्रक्रिया बेहतर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं और पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। मोदी यादव ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने का भरोसा भी दिलाया।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को अपने गृह नगर राघौगढ़ में इस महीने के अंत में प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए निमंत्रित भी किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक जवाब दिया।
शाम को दिग्विजय सिंह के निवास पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ हुई बैठक ने राजनीति की गहमागहमी को और बढ़ा दिया। राज्यसभा सांसद अशोक सिंह भी इस चर्चा में शामिल थे। कार्यालय द्वारा बैठक की पुष्टि करते हुए एक वीडियो भी जारी किया गया, हालांकि इस बैठक के विषय को सार्वजनिक नहीं किया गया जिससे अटकलें तेज हो गईं।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पूर्व एक दिन गुरुवार को कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक में दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच मामूली तनाव देखा गया था। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान वाल्मीकि और बसोड़ समुदायों को कांग्रेस में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने का मुद्दा उठाया और उनकी भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने जीतू पटवारी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्हें संगठनात्मक मामलों में अधिक स्वतंत्रता मिली है। इसपर जीतू पटवारी ने सम्मानजनक अंदाज में कहा, “मैं आपका शिष्य हूं” जबकि दिग्विजय सिंह ने हँसते हुए जवाब दिया, “गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गए।”
यह संवाद कांग्रेस के भीतर बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस पार्टी राज्यसभा चुनाव और दतिया विधानसभा उपचुनाव जैसे राजनीतिक महत्त्वपूर्ण आयोजनों की तैयारी कर रही है।
दिग्विजय सिंह हाल ही में राज्यसभा में अपना लगातार दूसरा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि वे तीसरे कार्यकाल के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक अपने नए उम्मीदवार का चयन नहीं किया है, जो आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक पहेली बना हुआ है।
सियासत में सक्रिय दिग्विजय सिंह की ये मुलाकातें और बैठकें प्रदेश की राजनीति में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं, जिनसे आगामी चुनावी रणनीतियों के संकेत मिल सकते हैं।

