MP न्यूज: महाकाल मंदिर परिसर में अंडरपास निर्माण के दौरान 2100 वर्ष पुराना प्राचीन शिवलिंग मिला

Rashtrabaan

    उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में चल रहे अंडरपास निर्माण कार्य के दौरान एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज हुई है। स्वयं स्थानीय प्रशासन और पुराविदों के समक्ष शुक्रवार सुबह एक प्राचीन शिवलिंग की खोज हुई, जिसने इतिहासकारों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रारंभिक जांच में पुराविदों का मानना है कि यह शिवलिंग लगभग 2100 वर्ष पुराना हो सकता है।

    संस्कृत तथा ब्राह्मी लिपि में अंकित लेख

    खुदाई के दौरान मिले इस शिवलिंग पर संस्कृत और ब्राह्मी लिपि में कुछ लेख अंकित पाए गए हैं, जो इसे और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं। ब्राह्मी लिपि प्राचीन भारत में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती थी, इसलिए विशेषज्ञ इस आधार पर इसके प्राचीन होने का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि इसे वैज्ञानिक दृष्टि से पूरी तरह जांचना अभी बाकी है, जिससे इसके संबंध में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

    सुरक्षा और संरक्षण

    शिवलिंग मिलने के बाद इसे तत्काल ही सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। पुरातत्व विभाग की टीम इसके संरक्षण और विस्तृत अध्ययन में जुटी हुई है ताकि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का सटीक निर्धारण किया जा सके।

    महाकाल वन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

    सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्ववेत्ता प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि महाकाल वन क्षेत्र का प्रत्येक भाग शिवमयी ऊर्जा से परिपूर्ण है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से शिव साधकों का प्रमुख केंद्र रहा है। चौबीस खंभा माता मंदिर, जिसे महाकाल वन का प्राचीन प्रवेश माना जाता है, से लेकर हरसिद्धि और महाकालेश्वर मंदिर तक इस क्षेत्र की शैव परंपरा स्पष्ट दिखती है।

    विक्रमादित्य कालीन विरासत

    इतिहासकार मानते हैं कि उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य काल में अनेक मंदिरों का निर्माण हुआ था, जो बाद में आक्रमणकारियों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए। वर्तमान निर्माण कार्य के दौरान वे प्राचीन मंदिर, शिवलिंग और मूर्तियां मिल रही हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक विरासत की गवाही देती हैं।

    वैशाख पूर्णिमा का शुभ योग

    यह शिवलिंग वैशाख पूर्णिमा के दिन मिलने का धार्मिक रूप से विशेष महत्व है, जो सुख, समृद्धि और उन्नति के संकेत माना जाता है। महाकाल मंदिर के पुजारियों ने इसका विधिवत पूजन किया, जिस मौके पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या जुटी।

    विशेष पूजा और जलाभिषेक

    वैशाख मास में भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व है, इसलिए शिवलिंग मिलने के उपरांत विशेष अभिषेक एवं पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे दिव्य संकेत मानकर अपनी आस्था व्यक्त की।

    पुराने अवशेषों की निरंतर खोजें

    महाकाल मंदिर परिसर में यह पहली बार नहीं है जब खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष मिले हों। लगभग पांच वर्ष पूर्व भी इसी क्षेत्र में एक हजार वर्ष पुराने शिव मंदिर के अवशेष मिले थे, जो महत्वपूर्ण खोज मानी गई थी।

    पुरातत्व विभाग का पुनर्निर्माण प्रयास

    मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग पहले मिले अवशेषों के आधार पर उसी स्थान पर एक प्राचीन शिव मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है। यह प्रयास ऐतिहासिक परंपरा को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को इसके महत्व से परिचित कराने की दिशा में है।

    इतिहास और आस्था का संगम

    महाकाल मंदिर परिसर में हो रही ये पुरातात्विक खोजें उज्जैन को न केवल एक धार्मिक स्थल बल्कि एक समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर स्थान भी साबित करती हैं। हर खुदाई के साथ इस नगर की प्राचीनता और पावनता की नई कहानी जुड़ती जा रही है, जो इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को और दृढ़ करती है।

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