कटंगी। वार्ड नंबर 11 के पार्षद मनीष चौकसे और नगर परिषद के बीच छिड़ी नूरा-कुश्ती में आखिरकार पार्षद की जीत हुई। बस स्टैंड पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर लगाई जा रही एलईडी स्क्रीन के विरोध में पार्षद ने 1 मई श्रमिक दिवस से आर-पार की जंग यानी धरने का ऐलान किया था। प्रशासन को दिए गए अल्टीमेटम के खत्म होने से ठीक पहले, 30 अप्रैल की शाम 5 बजते ही महकमे में खलबली मच गई। अपनी साख बचाने के लिए सीएमओ के निर्देश पर टीम मौके पर पहुंची और आनन-फानन में ढांचे को उखाड़कर जब्त कर लिया।
आखिर क्यों भड़के थे पार्षद?
➤ गरीबों के साथ अन्याय : पार्षद चौकसे का तर्क था कि जिस स्थान से पांच साल पहले सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीबों की चाय-पान की दुकानें हटाई गईं, वहां किसी बाहरी व्यक्ति को एलईडी लगाने की इजाजत देना अनैतिक है।
➤ अंधेरे में रखा गया परिषद को : बैठक में मुद्दा उठाते हुए पार्षद ने पूछा कि आखिर किसकी शह पर और किसके आदेश से यह ढांचा खड़ा हुआ? प्रभारी अध्यक्ष को छोड़ बाकी सभी पार्षदों ने भी चौकसे के सुर में सुर मिलाया।
➤ प्रशासनिक घेराबंदी : धरने की लिखित सूचना एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी को पहले ही दे दी गई थी, जिससे प्रशासन पर दबाव चरम पर था।
अल्टीमेटम का असर
जैसे ही 30 अप्रैल की शाम 5 बजे की डेडलाइन करीब आई, नगर परिषद की टीम ने सरेंडर कर दिया। पार्षद चौकसे ने इस कार्रवाई के बाद सीएमओ राधेश्याम चौधरी का आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दे दिया कि जनता के हक के लिए वे किसी भी हद तक झुकने वाले नहीं हैं।
-इनका कहना है
जब गरीबों की रोजी-रोटी छीनी गई थी, तब सौंदर्यीकरण याद आया था। आज उसी जगह रसूखदारों को एलईडी लगाने की इजाजत देना छोटे व्यापारियों के साथ भद्दा मजाक था।
➤ मनीष चौकसे, पार्षद
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