मुंबई। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्रीय विकास में पारसी समुदाय के योगदान की गहन सराहना व्यक्त की और इस बात पर जोर दिया कि भारत अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देश है। उन्होंने पारसी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक-आर्थिक विकास और घटती जनसंख्या को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी “आधुनिक भारत में पारसी: सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक पथों पर अग्रसर” यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित की गई, जहां रिजिजू ने अवेस्ता भाषा के पुनरुद्धार हेतु सरकार के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पारसी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों को उजागर करते हुए कहा कि यह समुदाय भारतीय इतिहास में अपनी अलग पहचान रखता है।
केंद्रीय मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भारत न केवल तेजी से विकास कर रहा है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है, बल्कि यह देश अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “मैं पारसी समुदाय को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि वे इस देश में सुरक्षित हैं और उनका संरक्षण हमारी प्राथमिकता है।”
रिजिजू ने टाटा परिवार द्वारा 1920 की ओलंपिक टीम के प्रायोजन और 1880 के दशक में पहली भारतीय क्रिकेट टीम के गठन में पारसी समुदाय की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की औद्योगिक एवं आर्थिक नींव में पारसियों का योगदान अतुलनीय है।
उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या संख्या महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि समुदाय का प्रभाव और योगदान मायने रखता है। सरकार हर समुदाय का सम्मान करती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के आदर्शवाक्य को निरंतर सशक्त बनाए रखती है। इनके तीसरे कार्यकाल में इसे “सबका विश्वास” और “सबका प्रयास” के साथ और मजबूती मिली है।
रिजिजू ने पारसी समुदाय के लिए चलाई जा रही “जियो पारसी” योजना पर सुझाव भी आमंत्रित किए, ताकि इसे और प्रभावशाली बनाया जा सके।
अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने पारसी समुदाय की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला, खासकर जनसंख्या स्थिरता के मुद्दे पर। उन्होंने कहा कि जनसंख्या में गिरावट और बदलते सामाजिक स्वरूप जैसी समस्याओं से निपटने के लिए नीतिगत समर्थन और सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने पारसी समुदाय के राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा और भारत की बहुलवादी संस्कृति को संरक्षित करने की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोग पारसी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जिनमें जनसांख्यिकीय चुनौतियां, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच शामिल है।
अल्पसंख्यक समुदायों की समृद्धि और सुरक्षा के लिए सरकार की यह प्रतिबद्धता इस बात का परिचायक है कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर समुदाय का सम्मान किया जाता है और उनका विकास सुनिश्चित किया जाता है।

