कांग्रेस में सत्ता संघर्ष के बीच बीजेपी ने तेजी से अपनी भूमिका को और भी स्पष्ट कर दिया है। हाल ही में श्री चंद्रशेखर ने कांग्रेस और विशेष तौर पर श्री वेणुगोपाल पर तीखे टिप्पणी की है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोप के ठीक बाद आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस राष्ट्रीय नेतृत्व में दल-बदल और गुटबाजी के कारण केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन में अनिश्चितता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी ने कांग्रेस के अंदर चल रही राजनीतिक उठापटक को सामने लाया है, जहां पार्टी ने केरल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद के नाम पर स्पष्टता नहीं दिखाई। इस स्थिति में भाजपा ने कांग्रेस पर अपने राजनीतिक फायदे के लिए निशाना साधना शुरू कर दिया।
चंद्रशेखर ने कांग्रेस नेतृत्व की इस अनिर्णयता को पार्टी के आंतरिक विवादों से जोड़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केरल कांग्रेस में गुटीय राजनीति क्या-क्या महत्ता रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इस राज्य में नेतृत्व के नाम को लेकर संघर्ष में फंसा हुआ है, जो उसकी विश्वसनीयता और फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाता है।
इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कांग्रेस केरल में मुख्यमंत्री पद के नाम की घोषणा करने में असमंजस में है और पार्टी के आंतरिक विवादों ने इसे प्रभावित किया है। उनका दावा था कि इस अनिश्चितता के पीछे गुटबाजी और पार्टी के अंदर के कई विरोधी गुटों का मूल कारण है। यह बात कि भाजपा स्वयं केरल में कांग्रेस की कमजोर स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस आरोप को आधारहीन बताया है और कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत इस बात का निर्णय करेगी कि केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार कौन होगा। वे यह भी कहते हैं कि भाजपा की कोशिशें केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने और आंतरिक मामलों में खलल डालने की हैं।
इस बीच केरल के राजनीतिक हालात पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री पद के चयन में देरी एक ऐसी समस्या है जिसे पार्टी को जल्द से जल्द सुलझाना होगा वरना यह स्थिति भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा की रणनीति पार्टी के आंतरिक संघर्ष का फायदा उठाकर अपने राजनीतिक दायरे को बढ़ाने की है, खासकर केरल जैसे संवेदनशील राज्य में।
कुल मिलाकर कहा जाए तो केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस की अनिर्णयता और भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि राज्य में राजनीतिक संघर्ष और सत्ता की दौड़ अब और भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस संकट से कैसे बाहर निकलती है और भाजपा अपनी भूमिका को कितनी प्रभावी तरीके से निभाती है।

