सीएम मोहन यादव ने उन्नत अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण पर वैज्ञानिकों को दी बधाई

Rashtrabaan

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ इंडिया तथा ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ विकसित करने वाले वैज्ञानिकों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। यह परीक्षण देश की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।

    अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी रक्षा प्रणाली अब और अधिक मजबूत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इस दिशा में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस उन्नत मिसाइल का सफल परीक्षण भारत के आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करता है।

    डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा से हाल ही में की गई इस मिसाइल टेक्नोलॉजी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि देश की वैज्ञानिक टीम उच्च तकनीकी उपलब्धियों में विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ रही है। ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ तकनीक ने कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने की क्षमता दिखाई है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

    इस मिसाइल परीक्षण में, मिसाइल को कई विस्फोटकों के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न लक्ष्य भेदने के लिए प्रक्षेपित किया गया। सभी लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाने में परीक्षण सफल रहा, जिससे इसका युद्ध कौशल बढ़ा है। कई स्थलीय और जहाज-आधारित स्टेशनों ने मिसाइल की उड़ान की निगरानी की और पूरी प्रक्रिया का डेटा संग्रहण किया। प्राप्त आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि परीक्षण के सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे हुए।

    डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं ने यह मिसाइल देश के उद्योगों के सहयोग से विकसित की है, जिससे तकनीकी क्षेत्र में भी भारत की क्षमता का प्रदर्शन होता है। इस कार्यक्रम में डीआरडीओ के शीर्ष वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने परीक्षण के सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डीआरडीओ, भारतीय सेना और उद्योग जगत की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूती प्रदान करेगी, खासकर बढ़ते जोखिम और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर।

    एमआईआरवी प्रणाली का अर्थ है कि एक मिसाइल पर विभिन्न परमाणु हथियारों को ले जाकर वे स्वतंत्र रूप से अलग-अलग समय पर और विभिन्न दिशाओं में छोड़े जा सकते हैं। यह तकनीक दुश्मन के लिए उन्हें रोकना अत्यंत कठिन बना देती है, जिससे भारत का रक्षा ढांचा अधिक सुरक्षित होता है। यह उपलब्धि पूरी जनता के लिए गर्व का विषय है।

    Source

    error: Content is protected !!