नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) के ट्रस्टी के रूप में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ अपने मत का उपयोग किया है। यह जानकारी विभिन्न विश्वसनीय रिपोर्ट्स में प्रकट हुई है, जिससे टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गंभीर विचार-विमर्श और नेतृत्व के बदलते स्वरूप पर ध्यान गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा ने मतदान की अंतिम तारीख से ठीक एक दिन पहले अपना वोट डाला था। पुनर्नियुक्ति के लिए सर्वसम्मति आवश्यक थी, जो कि नोएल टाटा के विरोध के कारण प्राप्त नहीं हो सकी। इससे यह साफ़ हो गया कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की टीईडीटी में पुनर्नियुक्ति संभव नहीं होगी।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण लिखा जा सकता है क्योंकि इससे पहले नोएल टाटा ने शासन संबंधी मामलों पर अन्य सीनियर ट्रस्टीज के साथ सामान्य सहमति बनाकर काम किया था। उनकी यह अलग राय टाटा ट्रस्ट्स के भविष्य के निर्णयों के लिहाज से एक बदलाव की ओर इशारा करती है।
वर्तमान में, श्रीनिवासन और सिंह अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होते ही टीईडीटी से इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं, जो ट्रस्ट्स के संचालन और रणनीति पर असर डाल सकता है।
टीईडीटी, टाटा ट्रस्ट्स के तहत एक प्रमुख धर्मार्थ संस्था है, जो छात्रवृत्ति एवं शिक्षा-उन्नयन से जुड़ी कई योजनाएं संचालित करती है। हालांकि इसका टाटा संस में कोई इक्विटी शेयर नहीं है, परंतु यह ट्रस्ट समूह के परोपकारी नेटवर्क में काफी प्रभावशाली माना जाता है और बड़ी धनराशि का प्रबंधन करता है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर शासन और नेतृत्व से सम्बंधित व्यापक विचार-विमर्श चल रहा है। टाटा संस बोर्ड में नामांकित सदस्यों के प्रदर्शन, भविष्य की नेतृत्व रणनीतियों और समूह की अन्य प्रमुख कंपनियों के प्रबंधन का औपचारिक पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, टायटन कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक भास्कर भट्ट को टाटा संस बोर्ड में शामिल किए जाने की संभावना है, जबकि वेणु श्रीनिवासन की टीम में भूमिका पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है। इससे पहले ट्रस्टी मेहली मिस्त्री और जे.एन. मिस्त्री ने भी पुनर्नियुक्ति प्रस्तावों के खिलाफ अपने मत व्यक्त किए थे।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की आगामी बैठकों को इस माह की शुरुआत से हटाकर 16 मई के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है, जहां इन सभी विषयों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम से टाटा ट्रस्ट्स के शासन और नेतृत्व में आने वाले संभावित बदलावों के संकेत मिलते हैं, जो समूह की भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

