नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, इज़राइल के प्रधानमंत्री ने ईरान युद्ध के दौरान गुप्त रूप से यूएई का दौरा किया था। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा उपायों को लेकर कई अनिश्चय बने हुए हैं।
इस घोषणा के ठीक एक दिन बाद, अमेरिका के इस्राइल के राजदूत मार्शल मेक हकेबी ने जानकारी दी थी कि इज़राइल ने यूएई को आयरन डोम एयर-डिफेंस हथियार भेजे हैं, साथ ही उन हथियारों को ऑपरेट करने के लिए आवश्यक कर्मचारी भी स्थानांतरित किए गए हैं। यह कदम दोनो देशों के बीच बढ़ती सैन्य और सुरक्षा सहयोग को दर्शाता है।
आयरन डोम एक अत्याधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली है जिसे इज़राइल ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य हवाई हमलों को रोकना और नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यूएई जैसे देशों को इस तकनीक की आपूर्ति क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को मजबूत करने का संकेत हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नेतन्याहू द्वारा यूएई की यह गुप्त यात्रा क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों का हिस्सा हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान की आक्रामकता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच अपने सुरक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना हो सकता है।
इज़राइल और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक संबंधों में मजबूती आई है। अब यह बढ़ते हुए सहयोग के संकेतों से लगता है कि दोनों देश एक साझा सुरक्षा दृष्टिकोण पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इस गुप्त यात्रा की विस्तार से जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इससे क्षेत्रीय राजनीति में कई नए समीकरण बनने की संभावना है।
यूएई में इस कदम को लेकर क्या प्रतिक्रिया है, इस पर अभी आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। परन्तु राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा और हथियारों की सप्लाई, ईरान की गतिविधियों को सीमित करने के लिए एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
यह मामले क्षेत्र में व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहा है, और आने वाले दिनों में इसके प्रभाव और प्रतिक्रिया स्पष्ट हो सकती है।

