मुंबई। सेंट्रल रेलवे के दो अलग-अलग रूट्स पर चल रही भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में गर्भवती महिलाओं ने सुरक्षित रूप से बच्चियों को जन्म दिया। इस दौरान रेलवे कर्मचारी, नर्स, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान और यात्री एकजुट होकर मां और नवजात की जान बचाने में तत्पर रहे।
पहली घटना 22538 कुशीनगर एक्सप्रेस ट्रेन में हुई, जो मुंबई से भुसावल जा रही थी। मुख्य टिकट निरीक्षक आर.एस. तेली, जो इस समय लोकमान्य तिलक टर्मिनस से भुसावल सेक्शन तक ड्यूटी पर थे, को कल्याण स्टेशन के पास जनरल डिब्बे के यात्रियों से सूचना मिली कि एक गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा हो रही है। जनरल डिब्बे में भारी भीड़ के कारण महिला की हालत गंभीर हो रही थी।
रेलवे कर्मचारियों ने महिला को ए-1 कोच के पास दरवाजे की जगह पर सुरक्षित किया। इस बीच, जनरल डिब्बे में सफर कर रही नर्स पूजा खड़गे तत्काल सहायता के लिए आगे बढ़ीं और उनकी मदद से चलती ट्रेन में ही महिला का सामान्य प्रसव कराया गया। महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
इसके तुरंत बाद छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल ऑफिस को सूचना दी गई। इगतपुरी स्टेशन पर एंबुलेंस, स्ट्रेचर, डॉक्टर और डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट की व्यवस्था करवाई गई। ट्रेन के स्टेशन पर पहुँचते ही मां और नवजात बच्ची को रेलवे अस्पताल में ले जाया गया जहां उनकी स्थिति सुरक्षित बताई गई।
दूसरी घटना पुणे-सुपौल एक्सप्रेस में हुई, जो पुणे से बिहार के सुपौल जिले जा रही थी। 28 वर्षीय रुखसाना खातून, जो अपने पति जमील बेलावर के साथ यात्रा कर रही थीं, को अहिल्यनगर स्टेशन के पास तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। ट्रेन तेज रफ्तार में होने और डिब्बे में भीड़ के कारण तत्काल चिकित्सा सहायता मिल पाना मुश्किल था।
तत्काल रेलवे अधिकारियों ने ‘ऑपरेशन मातृशक्ति’ शुरू किया। आरपीएफ जवान, रेलवे कर्मचारी और यात्रियों ने मिलकर सुरक्षित तौर पर ट्रेन के अंदर रुखसाना का प्रसव कराया। बाद में दोनों मां-बच्ची को मेडिकल सहायता प्रदान की गई और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई।
ये दोनों घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जब मेडिकल आपातकाल होता है तो रेलवे कर्मचारी, सुरक्षा बल, डॉक्टर और यात्रियों की तत्परता और सहयोग से जीवन बचाना संभव होता है। इस तरह की तैयारियों और तत्परता से रेलवे सेवा पर जनता का भरोसा और बढ़ता है।

