लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार बड़े दुख और संवेदना के साथ किया गया। उनकी पंचतत्व में विलीन हो जाने से परिवारजन, राजनीतिक साथी और समर्थक गहरे शोक में डूब गए। राजधानी लखनऊ के भैंसाकुंड स्थित बैकुंठ धाम में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में गमगीन माहौल था।
अंतिम संस्कार की शुरुआत उनके ससुर और वरिष्ठ पत्रकार रहे अरविंद बिष्ट ने मुखाग्नि देकर की, जो इस अवसर पर भावुक हो गए। उन्होंने अपने दामाद को गमछे से आंसू पोंछते हुए हाथ जोड़कर अलविदा कहा। पूरा श्मशान घाट शोकाकुल था, जहां समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पहुंचे। उन्होंने अपने छोटे भाई प्रतीक यादव को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। साथ ही उन्होंने अपने भाइयों धर्मेंद्र यादव और आदित्य यादव के साथ मिलकर चिता पर लकड़ियां रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव और उनकी दो बेटियां प्रथमा और पद्मजा भी मौजूद थीं। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के लोग एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे। श्मशान घाट पर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव एक साथ बैठे दिखे, जहां प्रतीक की बेटियां भी उनके पास थीं। अखिलेश के बेटे अर्जुन यादव भी परिवार के साथ मौजूद थे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी इस दुखद मौके पर अपना सौंपा।
प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा उनके आवास से निकाली गई, जिसमें हजारों समर्थकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान “प्रतीक यादव अमर रहें” के नारे गूंजते रहे। समाजवादी पार्टी और भाजपा के कई नेता भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने अर्थी को कंधा दिया जबकि धर्मेंद्र यादव अंतिम समय तक साथ रहे। पारंपरिक विधि के अनुसार शव को पांच बार जमीन पर रखा गया और पीछे से समर्थकों ने श्रद्धांजलि दी।
प्रतीक यादव अपने पशु प्रेम के लिए भी जाने जाते थे। इस कारण उनकी पत्नी अपर्णा यादव ने शव वाहन पर उनकी पालतू कुत्तों और बंदर के साथ उनकी तस्वीर लगवाई, जो वहां मौजूद लोगों के लिए काफी भावुक कर देने वाला था। बुधवार की रात अपर्णा अपनी दोनों बेटियों के साथ प्रतीक के पार्थिव शरीर के पास बैठी रहीं। इससे पहले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, डिंपल यादव और शिवपाल यादव सहित कई नेताओं ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रतीक यादव की निधन से ना केवल परिवार बल्कि राजनीतिक जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी सादगी, नीति और जनसेवा के लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनके जाने से एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ है, जिसे भर पाना संभव नहीं होगा। पूरा समाजवादी परिवार और उनके समर्थक इस अपूरणीय क्षति को सहन कर रहे हैं।

