श्रेयस पांडे के साथ हुई खास बातचीत में, अभिनेता रंदीप हुड्डा और निर्माता-निर्देशक नीरज पाठक ने वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ के दूसरे सीजन को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। इस साक्षात्कार में रंदीप ने फिल्मों और वेब सीरीज के बीच के अंतर, खासकर एक्शन दृश्यों की शूटिंग में पाए जाने वाले विभिन्न अनुभवों पर प्रकाश डाला।
रंदीप ने बताया कि बॉलीवुड में एक्शन के दृश्य अक्सर नाटकीय होते हैं, जबकि हॉलीवुड की फिल्मों में ये दृश्य यथार्थवादी और सूक्ष्म होते हैं। इसके चलते शूटिंग के तौर-तरीकों में भी फर्क आता है। उन्होंने कहा, “हॉलीवुड में एक्शन करते समय धीमी गति और सटीकता पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, जबकि बॉलीवुड में दर्शकों की उम्मीदों के अनुसार एक्शन को और भी ज्यादा जोरदार बनाना होता है।”
सीरीज के निर्माण से जुड़ी कुछ तकनीकी बातों पर नीरज पाठक ने बताया कि ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में चौथा दीवार तोड़ने का प्रयोग काफी प्रभावशाली तरीके से किया गया है। यह दर्शकों को कहानी के अंदर घेरने का एक नया तरीका पेश करता है, जो कि इंडियन वेब कंटेंट के लिए अपेक्षाकृत नई तकनीक है।
रंदीप ने यह भी साझा किया कि वे अपने किरदारों का चयन बहुत सोच-समझकर करते हैं। वह कहते हैं, “मैं हमेशा ऐसे किरदार चुनता हूं जिनमें कुछ नया हो, जो मेरी कहानी कहने की क्षमता को चुनौती दें।” उन्होंने यह भी कहा कि ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ जैसे प्रोजेक्ट्स उन्हें एक अलग और बेहतर कलाकार बनने का मौका प्रदान करते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने वेब सीरीज की लोकप्रियता बढ़ने के कारण आर्टिस्ट्स को मिल रही नई आज़ादी पर भी चर्चा की। रंदीप ने कहा, “पहले जहां फिल्मों में कंटेंट को लेकर सीमितताओं का सामना करना पड़ता था, वहीं वेब सीरीज में हमारे पास सोचने-समझने की ज्यादा स्पेस होता है।”
निष्कर्षत: इस बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ सीजन 2 भारतीय दर्शकों के लिए एक रोमांचक और नए अनुभव का वादा करता है। रंदीप हुड्डा और नीरज पाठक के प्रयासों से यह प्रोजेक्ट इंडियन वेब स्पेस में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर सकता है।

