लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के द्वारा ब्राह्मण समुदाय को लेकर दिए गए विवादित बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस टिप्पणी को अभद्र और आपत्तिजनक बताते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव से ब्राह्मण समाज से माफी मांगने का आग्रह किया है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि सपा प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज के प्रति की गई अभद्र टिप्पणियों को लेकर समाज में भारी रोष है और इसका तीव्र विरोध स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज करने के बावजूद विवाद थमा नहीं है और सपा नेतृत्व की चुप्पी इस समस्या को और बढ़ा रही है। इससे स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है।
बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि राजकुमार भाटी के गैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के सम्मान को ठेस पहुंची है, जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अपील की कि वे इस मामले को गंभीरता से लेकर ब्राह्मण समाज से तुरंत माफी एवं पश्चाताप करें ताकि शांति एवं सामाजिक सद्भाव कायम रह सके।
मायावती ने इस प्रकरण से यह भी कहा कि सपा का जातिवादी रवैया बदले बिना दलित, अति-पिछड़ों और मुस्लिम समुदायों की तरह ही ब्राह्मण समाज के खिलाफ भी गहरा गया है। उन्होंने वर्तमान सरकार के ब्राह्मण समाज के प्रति रवैये पर भी नाराजगी जताई। बसपा प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी ने हमेशा सभी समाजों का समान सम्मान करते हुए ब्राह्मणों को भी उचित स्थान और भागीदारी दी है, जिससे यह भावना बनी है कि यहां किसी का उपेक्षा या इस्तेमाल नहीं होता।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब सपा नेता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज के बारे में ऐसा बयान दिया जो सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर विवादित साबित हुआ। उनकी टिप्पणी पर विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों ने आपत्ति जताई और कड़ी कार्यवाही की मांग की। विवाद बढ़ने पर भाटी ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी।
राजनीतिक गलियारों में इस विवाद ने जातीय राजनीति की पुरानी जड़े उजागर कर दी हैं, और इसके प्रभाव से समाज में एक बार फिर से तनाव फैलने का खतरा बना हुआ है। मायावती की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हो गया है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सहिष्णुता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और विवादित बयानबाजी से दूर रहना होगा।

