इंदौर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद में शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर वाग्देवी सरस्वती का मंदिर है और मुस्लिम पक्ष के कमाल मौला मस्जिद के दावे को निरस्त कर दिया। सरकार पर भरोसा जताते हुए, मुस्लिम समुदाय के लिए अयोध्या की तर्ज पर अलग इंतजाम करने को कहा गया है।
कोर्ट का आदेश है कि भोजशाला परिसर एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रतिष्ठान है जहां केवल पूजा-अर्चना की अनुमति होगी। इसी परिसर में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जा सकती है, जबकि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) का नियंत्रण भी बरकरार रहेगा।
इंदौर हाई कोर्ट ने मुसलमानों से कहा है कि उनका इस परिसर पर कोई अधिकार नहीं है, परंतु सरकार से कमाल मस्जिद के लिए अलग जगह की मांग कर सकते हैं। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वे परिसर की व्यवस्था का निरीक्षण करें और सिर्फ पूजा की अनुमति दें।
इस विवादित क्षेत्र को 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यह क्षेत्र पूरी तरह से धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भोजशाला और देवी सरस्वती मंदिर की भूमि है। ASI के 2003 के आदेश को अदालत ने रद्द कर दिया है, जिसमें पूजा प्रतिबंधित थी और नमाज की अनुमति थी।
इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से सुनवाई शुरू की थी। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 12 मई को अपना निर्णय सुरक्षित रखा गया।
समुदायों के दावे
धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद स्वीकार करता है। साथ ही, जैन समुदाय ने मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है।
विस्तृत सुनवाई एवं सबूत
हाई कोर्ट ने हजारों दस्तावेजों, तलाशी रिपोर्टों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पक्षों को सुनते हुए इस विवाद को समझा। सभी समुदायों ने अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक दलीलें पेश कीं तथा इस स्मारक के संरक्षण और पूजा-अर्चना से संबंधित विशेष अधिकार मांगे। यह स्मारक ASI के संरक्षण में रखा गया है।
ASI का सर्वेक्षण
ASI ने दो हजार से अधिक पन्नों की वैज्ञानिक रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मस्जिद परिसर से पूर्व धार के परमार राजाओं के समय की एक विशाल संरचना थी। वर्तमान विवादित संरचना मंदिर के हिस्सों का पुनः उपयोग कर बनाई गई थी।
पक्षों की दलीलें
हिंदू पक्ष ने ASI की रिपोर्ट में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख को अपने दावे का साक्ष्य बताया। वहीं मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आरोप लगाए कि यह पक्षपातपूर्ण है और इसे हिंदू पक्ष के दावों को समर्थन देने के लिए बनाया गया है।
ASI का जवाब
ASI ने अदालत में कहा कि सर्वेक्षण निष्पक्ष और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया गया। सर्वेक्षण दल में तीन मुस्लिम सदस्य तथा मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जो निष्पक्षता की गारंटी है।
हाई कोर्ट ने दिया सर्वेक्षण का आदेश
11 मार्च 2024 को कोर्ट ने ASI को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया। ASI ने 22 मार्च से सर्वेक्षण शुरू कर 15 जुलाई 2024 को विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी।
धार में बढ़ाई गई सुरक्षा
भोजशाला मंदिर के रूप में फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस प्रशासन ने पूरी सतर्कता बरतते हुए हाई अलर्ट जारी किया है ताकि शांति बनी रहे।

