उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण प्रसव के मामले ने मेडिकल जगत में खूब चर्चा बटोरी है। मोहम्मद आलिम और उनकी पत्नी अमीना के यहां निकाह के दो साल बाद चार बच्चों का जन्म हुआ है, जो पांच दिनों के अंतराल पर आए हैं। सभी बच्चों का जन्म सामान्य प्रसव के माध्यम से हुआ है, और यह मामला सीधे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है, जहां डॉक्टरों की टीम ने इस उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की सफलतापूर्वक देखभाल की।
गर्भावस्था के दूसरे महीने में हुआ पता
डॉक्टरों के मुताबिक, अमीना की गर्भावस्था शुरुआत से ही हाई रिस्क श्रेणी में थी। दूसरे महीने के अल्ट्रासाउंड में पता चला कि गर्भ में चार बच्चे हैं, जिनकी वृद्धि अलग-अलग थैली में हो रही थी। इस वजह से गर्भधारण की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। चिकित्सकों ने परिवार को भ्रूणों की संख्या घटाने के लिए ‘फीटल रिडक्शन’ का सुझाव दिया, ताकि मां और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, लेकिन परिवार ने यह विकल्प स्वीकार नहीं किया।
गर्भावस्था के दौरान आईं जटिलताएं
पूरी गर्भावस्था में अमीना को उच्च रक्तचाप और लिवर से जुड़ी समस्याएं हो रही थीं, जिन्हें देखते हुए डॉक्टरों ने हर 15 से 20 दिन पर नियमित जांच और उपचार सुनिश्चित किया। परिवार भी समय-समय पर टीएमयू अस्पताल पहुंचता रहा ताकि सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा सकें। चिकित्सकीय टीम की सतत निगरानी के कारण मां और बच्चों की स्थिति स्थिर बनी रही।
पहले बच्चे का जन्म 9 मई को
आठ मई को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और अमीना को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 9 मई को सामान्य प्रसव के जरिए पहले बच्चे का जन्म हुआ, जिसका वजन लगभग 710 ग्राम था। प्रसव के बाद अमीना की स्थिति स्थिर होने पर उन्हें चिकित्सकीय निगरानी के बाद घर भेज दिया गया, लेकिन डॉक्टरों की टीम लगातार संपर्क में रही।
तीन और बच्चे पांच दिन बाद पैदा हुए
गुरुवार को पुनः प्रसव पीड़ा होने पर परिवार अमीना को फिर से टीएमयू अस्पताल लेकर पहुंचा। अस्पताल में सुबह तक एक और बेटा तथा दो बेटियां बनीं। इन्हें भी जन्म के समय एक किलोग्राम से कम वजन दर्ज किया गया। नवजातों को विशेष देखभाल के लिए अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी हर समय निगरानी कर रहे हैं।
डॉक्टरों ने माना बेहद दुर्लभ केस
टीएमयू अस्पताल के निदेशक अजय गर्ग ने बताया कि चार बच्चों का इस तरह से सामान्य डिलीवरी के माध्यम से जन्म होना मेडिकल साइंस में अत्यंत दुर्लभ है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शलभ अग्रवाल ने कहा कि सामान्य नवजात का वजन 2.5 से 3.5 किलोग्राम होता है, और कम वजन वाले बच्चों में संक्रमण एवं श्वसन जैसी जटिलताओं का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए चारों बच्चों को विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन लगातार बच्चों व मां की स्थिति पर नजर रख रहा है और उनकी देखभाल में जुटा हुआ है। इस प्रकार का मामला मेडिकल इतिहास में कई बार नहीं देखा गया और यह चिकित्सा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


