दलित संघर्ष समिति के नेता ने कहा है कि अब समय आ गया है कि इस मुद्दे के आस-पास एक जन आंदोलन खड़ा किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि संगठित तरीके से लोगों को आगे आना होगा ताकि देश में न्याय और समानता के अधिकारों की रक्षा हो सके।
मावल्ली शंकर ने बताया कि वर्तमान राजनीतिक हालात में दलों की भूमिका प्रभावित होती दिख रही है। विशेष रूप से कांग्रेस पर उन्होंने आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग के खिलाफ प्रभावी विरोध प्रदर्शन नहीं कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दलित एवं वंचित समुदायों के मुद्दों को उठाने के लिए जनसामान्य की भागीदारी आवश्यक है। जब तक आम जनता एकजुट नहीं होगी, तब तक समाज में वास्तविक बदलाव नहीं आ सकता। इसलिए संगठन को मजबूत बनाना और प्रत्येक नागरिक को जागरूक करना होगा।
मावल्ली शंकर ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को हर हाल में निष्पक्ष और स्वतंत्र रहना चाहिए क्योंकि समाज का विश्वास इस पर ही टिका होता है। यदि राजनीतिक दल इस पर मौन रहते हैं या प्रभावी विरोध नहीं करते तो इससे लोकतंत्र का नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, “यह समय है कि हम अपनी लड़ाई को जन आंदोलन में बदलें और सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलें। केवल शिकायत करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे, तभी हमारी आवाज को सुना जाएगा।”
दलित संघर्ष समिति नेताओं का मानना है कि बदलाव तभी संभव है जब व्यापक जनभागीदारी होगी। इसके लिए सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों पर केंद्रित जागरूकता अभियान चलाना अनिवार्य है। उन्होंने आगामी दिनों में कई कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना बनाई है ताकि इस दिशा में ठोस प्रगति हो सके।
देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सभी नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहना होगा तथा वैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी। यही एकमात्र रास्ता है जो समाज को समरसता और न्याय के साथ आगे बढ़ा सकता है।

