मध्य प्रदेश में पेसा प्रेरकों की सेवाएं निरंतर बनाए रखी जाएं: उमंग सिंघार

Rashtrabaan

    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जोरदार अपील की है कि पेसा एक्ट के तहत नियुक्त पेसा प्रेरकों की सेवाएं निरंतर जारी रखी जाएं। उनका कहना है कि पेसा एक्ट के सफल क्रियान्वयन में ये प्रेरक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिन्हें हटाने से आदिवासी जिलों में काम प्रभावित होगा।

    उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में बताया कि पेसा यानी पंचायती राज संस्थाओं पर अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार अधिनियम 1996 के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने प्रेरकों की नियुक्ति की थी, जो 15 नवम्बर 2022 को राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से प्रारंभ किए गए थे। ये प्रेरक राज्य के आदिवासी इलाकों में पंचायत स्तर पर कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहायता करते थे और सरकार की नीतियों को जमीन तक पहुंचाने का काम करते थे।

    उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार के सत्ता में रहने के दौरान ये नियुक्तियां हुई थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने बजट की कमी बताकर इनके सेवाएं समाप्त कर दी हैं, जिसकी वजह से हजारों प्रेरक बेरोजगार हो गए हैं। यह निर्णय आदिवासी जिलों के विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा क्योंकि ये प्रेरक गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करते और सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरवाने में मदद करते थे।

    सिंघार ने तर्क दिया कि सरकार ने बिना कोई वैकल्पिक योजना बनाए और बिना भविष्य की चिंता किए हजारों परिवारों के रोजगार छीन लिए हैं। इस कारण उन प्रेरकों के परिवार मुश्किल में आ गए हैं, कुछ ने अपने घर चलाने के लिए कर्ज लिया था, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए सपने संजोए थे। यद्यपि इन प्रेरकों की भूमिका बहुत संवेदनशील और आवश्यक है, फिर भी सरकार ने उनकी सेवाएं अचानक बंद कर दी।

    नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार प्रेरकों की जगह आरएसएस से जुड़े लोगों को भर्ती करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए प्रेरक मात्र आंकड़े हो सकते हैं, लेकिन हजारों परिवारों के लिए यह नौकरी उनकी जीवन धारा है। अतः उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पेसा एक्ट के प्रभावी कार्यान्वयन तथा मोटे तौर पर पांच हजार प्रेरकों के हित को ध्यान में रखते हुए उनकी सेवाएं जल्द ही पुनः बहाल की जाएं।

    उमंग सिंघार की यह मांग आदिवासी इलाके के विकास एवं पंचायत कार्यों के सुचारू संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पेसा प्रेरक ग्रामीण व आदिवासी समुदायों के लिए桥 कड़ी का काम करते हैं, जिससे शासन की योजनाएं सीधे जनता तक पहुंच पाए। सरकार से उम्मीद जताई जा रही है कि वह इस मुद्दे को संवेदनशीलता से लेते हुए उचित निर्णय लेगी और प्रेरकों की सेवाएं दोबारा चालू करेगा।

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