इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगने को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिससे उनकी जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की क्षमता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि इस प्रतिबंध ने उन्हें गवर्नेंस में असमंजस और गलत प्रथाओं को लोगों तक पहुँचाने से रोक दिया है। सोशल मीडिया को वे एक महत्वपूर्ण मंच मानती हैं जहां वे सीधे जनता से जुड़ सकती हैं और समस्याओं को समाज के सामने रख सकती हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा विभिन्न खातों पर रोक लगाना एक आम प्रक्रिया बन गई है। इल्तिजा मुताबिक, यह कदम लोकतांत्रिक संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा बनता जा रहा है, खासकर उन आवाजों के लिए जो सत्ता के खिलाफ सवाल उठाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रतिबंध सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्टाचार को छुपाने का एक साधन बन सकते हैं।
सोशल मीडिया का महत्व आज के दौर में अत्यधिक बढ़ गया है। यह न केवल सामाजिक संबंधों को बनाये रखने में मदद करता है, बल्कि सार्वजनिक मुद्दों को उजागर करने का एक प्रभावी जरिया भी बन चुका है। इल्तिजा मुफ्ती जैसे कार्यकर्ता और राजनेता सोशल मीडिया के जरिए आम जनता तक अपनी बात पहुँचाते हैं, जिससे सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
अधिकारी और विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि सोशल मीडिया पर लगाये जाने वाले प्रतिबंधों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और तथ्यात्मक सूचना के प्रवाह को रोकना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। ऐसे प्रतिबंधों से न केवल सूचना का त्वरित प्रवाह बाधित होता है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कम होता है।
इल्तिजा ने कहा, “जब मेरा अकाउंट बंद किया गया तो मैं अपने समर्थकों और आम लोगों तक अपनी बात पहुँचाने में असमर्थ हो गई। इससे न केवल मेरा काम प्रभावित हुआ, बल्कि इसकी प्रतिध्वनि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी देखने को मिली।” उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से अपील की है कि वे प्रतिबंध लगाने से पहले उसकी गहन समीक्षा करें और लोकतंत्र के मूल्यों का सम्मान करें।
यह मुद्दा केवल सोशल मीडिया पर आवाज दबाने का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संवाद और पारदर्शिता की रक्षा का भी है। इल्तिजा मुफ्ती का मानना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक को अपनी बात रखने का पूर्ण अधिकार हो, चाहे वह कितनी भी बड़ी या छोटी बात क्यों न हो। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों को हटाना और एक खुला संवाद कायम करना आवश्यक है ताकि शासन व्यवस्था में सुधार हो सके और आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके।
अंततः, यह आवश्यक है कि हम डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करें और किसी भी तरह की सेंसरशिप से बचाव करें। ऐसी पहलें लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेंगी और जनता एवं सरकार के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करेंगी। इल्तिजा मुफ्ती की यह अपील एक लोकतांत्रिक समाज की प्रतिबद्धता को दर्शाती है जहां हर आवाज को सुना जाना चाहिए।

