पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने उन पोलिंग बूथों में पुनः मतगणना कराने का ऐलान किया है, जहां यह पुष्टि हुई है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बटन को टेप करके छेड़छाड़ की गई है। यह जानकारी एएनआई ने दी है।
राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान के बाद यह फैसला आया है, जिसमें ईवीएम की विश्वसनीयता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है। इस मामले की जांच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद तेज हो गई। भाजपा ने आरोप लगाया था कि फलता विधानसभा क्षेत्र में कई मतदान बूथों पर बीजेपी के वोटिंग बटन को टेप से ढका गया था, जिससे मतदाताओं को वोट देने में बाधा आई।
भाजपा के प्रचार प्रमुख अमित मलवीय ने उन बूथों में तत्काल पुनः मतदान की मांग की है जहाँ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। मलवीय ने सोशल मीडिया पर वीडियो भी साझा किया था, जिसमें बूथ संख्या 170 पर बीजेपी और अन्य प्रत्याशी के मतदान बटन टेप से ढके हुए दिखाए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि बूथ संख्या 189 समेत कई अन्य पोलिंग बूथों में भी इसी प्रकार की मनमानी की गई है।
अमित मलवीय ने इस घटना को ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ बताया, जो कि चुनावी घोटालों में इस्तेमाल होने वाली एक रणनीति है। उन्होंने कहा यह मॉडल तृणमूल कांग्रेस की रणनीति पर आधारित है, और यह मतदाताओं के हक को प्रभावित करता है। ऐसे दावों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जहां भी इस प्रकार के चुनावी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां पुनः मतदान कराया जाएगा ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी बने।
चुनाव आयोग का यह क़दम पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर उठे विवादों में एक बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। निर्वाचन आयोग के इस निर्देश से उम्मीद जताई जा रही है कि मतदाता पूरी स्वतंत्रता और सही जानकारी के साथ अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे।
चुनाव आयोग के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की सुरक्षा और वोटिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी शिकायतों की जांच जिम्मेदारी से की जाएगी और आवश्यकतानुसार पुनः मतदान कराया जाएगा।
इस पूरे मामले ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की साख पर सवाल उठाए हैं, जिससे कल्याणकारी और लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती बनाए रखना जरूरी हो गया है। चुनाव आयोग का यह कदम इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

