जम्मू-कश्मीर में मौसम की मार जारी है। रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में भारी बारिश और बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लापता हैं। कई मकान बह गए और इलाका जलमग्न हो गया। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। वहीं, रियासी जिले के महौर इलाके में लगातार बारिश से भूस्खलन हुआ, जिसमें सात लोगों के शव मलबे से निकाले गए। कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। ये घटनाएं राज्य में मानसून की वजह से बढ़ते खतरे को उजागर कर रही हैं।
रामबन में फ्लैश फ्लड का कहर
रामबन के राजगढ़ में ऊपरी इलाकों में बादल फटने से नदी-नालों में उफान आ गया। फ्लैश फ्लड ने गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चार लापता हैं। कई घर पूरी तरह तबाह हो गए, और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचकर सर्च अभियान चला रही हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित किया जा रहा है, और राहत कैंप स्थापित किए गए हैं। रामबन के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए सभी संसाधन लगाए गए हैं, लेकिन लगातार बारिश से चुनौतियां बढ़ रही हैं।
रियासी में भूस्खलन की घटना
रियासी जिले के महौर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटना ने और तबाही मचाई। यहां मलबे से अब तक सात शव बरामद हो चुके हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में बताया गया है कि लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हुआ, जिसमें कई लोग दब गए। रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। रियासी और डोडा जैसे जिलों में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जहां 36 से ज्यादा मौतें हुईं।
जम्मू-कश्मीर में मानसून की मार
अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर में मानसून ने खासा कहर बरपाया है। लगातार फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं हो रही हैं। जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने में 36 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। दिल्ली में भी अगस्त में 399.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 15 साल का रिकॉर्ड है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में और बारिश हो सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
राहत और बचाव के प्रयास
प्रशासन ने सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की हैं। हेलिकॉप्टरों से फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत कार्य में कोई कोताही न बरती जाए। स्थानीय लोग भी मदद में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश से चुनौतियां बढ़ रही हैं।