ड्रिश्यम 3 मूवी रिव्यू: मोहनलाल ही फ्रेंचाइजी की सबसे कमजोर फिल्म में बचाव की उम्मीद

Rashtrabaan

    ड्रिश्यम 3 फिल्म की समीक्षा करते हुए यह कहा जा सकता है कि मोहनलाल का जॉर्जकुट्टी के किरदार में अभिनय ही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। निर्देशक जीतू जोसफ की पुरानी शैली और भारी-भरकम नाटकीयता के कारण फिल्म कई बार धीमी और बोझिल महसूस होती है, लेकिन मोहनलाल की परफॉर्मेंस ने फिल्म को पूरी तरह से डूबने से बचा लिया है।

    जॉर्जकुट्टी का किरदार दर्शकों के लिए बेहद प्रिय रहा है और इस बार भी मोहनलाल ने उसे जीवन्त बनाए रखने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उनकी भावनाओं का सटीक प्रस्तुतीकरण, सहज संवाद अदायगी और किरदार के प्रति समर्पण दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि, बाकी फिल्म की कहानी और निर्देशन उतनी प्रभावशाली नहीं है जितनी कि हम इससे उम्मीद करते हैं।

    फिल्म के विज़ुअल स्टाइल में पुरानी तकनीकों का प्रयोग देखने को मिलता है, जो आज के दौर के हाई-टेक और इनोवेटिव सिनेमैटोग्राफी से पीछे लगते हैं। वहीं, पटकथा में कहीं-कहीं अतिशयोक्ति देखने को मिलती है, जिससे कहानी का प्रभाव कम हो जाता है। लेकिन मोहनलाल की अदाकारी इन कमजोरियों को कुछ हद तक कम कर पाती है।

    ड्रिश्यम 3 की कहानी एक बार फिर से जॉर्जकुट्टी और उसके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां वे अपने भूतपूर्व अनुभवों से जूझते हैं। हालांकि, कहानी में कुछ नई कहने की बातें नहीं मिलतीं, पर मोहनलाल ने अपने पात्र की गहराई और जटिलताओं को उकेर कर दर्शकों का ध्यान केंद्रित रखा।

    फिल्म की नाटकीयता और फिल्मांकन शैली आज के यूजर की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती, लेकिन मोहनलाल की मौजूदगी फिल्म को खास बनाती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यदि आप फ्रेंचाइजी के प्रशंसक हैं तो ड्रिश्यम 3 जरूर देखें, खासकर मोहनलाल के अभिनय की वजह से। इस फिल्म में निर्देशक की कुछ कमजोरियां हो सकती हैं, लेकिन अभिनेता की लगन दर्शकों को बांधे रखती है।

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