करणपुर धाम में मातारानी के जागरण में उमड़ा भक्तों का सैलाब, गंगापुर सिटी में भक्ति का अद्भुत संगम

Rashtrabaan

    गंगापुर सिटी। करणपुर धाम में छठ मेले के दौरान मातारानी के जागरण ने आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल होकर मातारानी के दरबार में झूमते और प्रार्थना करते हुए नजर आए। मां गुमानो बीजासणी देवी सेवा समिति करणपुरवाली द्वारा आयोजित इस आयोजन में गंगापुर सिटी से आठ बसों और सैकड़ों चारपहिया वाहनों के माध्यम से भक्त पहुंचकर मातारानी की आराधना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

    मातारानी के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए मां गुमानो यात्री निवास में भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर खुद को धन्य महसूस किया। रात्रि में हुए भव्य जागरण में भक्तजन देर रात तक मातारानी के भजनों पर झूमते और भक्ति भाव में लीन नजर आए। जागरण की भव्यता और भक्तजनों की आस्था का यह कार्यक्रम गंगापुर सिटी के धार्मिक आयोजन की उम्दा छवि पेश करता है।

    कार्यक्रम के दौरान नव नियुक्त पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों का औपचारिक परिचय कराया गया, जो आयोजन के सफल संचालन में योगदान देने वाले प्रमुख सदस्य हैं। कार्यक्रम के मध्य में सात चूणरियों की लॉटरी निकाली गई, जिससे जागरण में विशेष उत्साह और आनंद बना रहा। पूरी रात चले इस जागरण का समापन मातारानी की आरती के साथ किया गया, जो सभी के मन को आनंदित कर गया।

    इस धार्मिक आयोजन में समिति अध्यक्ष महेष शर्मा, उपाध्यक्ष नरेन्द्र शर्मा, महामंत्री कैलाष गुप्ता, मंत्री दिनेष गुप्ता चूडी, कोषाध्यक्ष हरकेष पटवारी, संरक्षक कमलेष शर्मा तथा अन्य कई कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा मुरारी महाराज, शिवचरण एलआई, विष्णु करणपुर, विष्णु करणपुर, त्रिलोक मुदगल, मुकेष लाइट, घनश्याम सैमरदा, विनोद बंसल, नवनीत खिडखिडा, गोपाल सोनी, डॉ. विजेंद्र गुप्ता समेत हजारों श्रद्धालु इस आयोजन का हिस्सा बने।

    यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक श्रद्धा का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। इसने गंगापुर सिटी में भक्ति और परंपरा की गूंज को और प्रबल किया तथा सभी के दिलों में मातारानी के प्रति गहन श्रद्धा को और बढ़ावा दिया। यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी ऐसी ही भक्ति और उत्साहपूर्ण परंपरा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

    Source

    error: Content is protected !!