नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों की लहर ने आम लोगों को राहत देने की उम्मीद जगा दी है। केंद्र सरकार ने रोज़मर्रा की वस्तुओं जैसे चॉकलेट, आइसक्रीम, पेस्ट्री, और ब्रांडेड मिठाइयों को 12 फीसदी GST स्लैब से हटाकर 5 फीसदी स्लैब में लाने की योजना बनाई है। यह कदम स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद तेजी से लागू होने की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर गणेश चतुर्थी और दिवाली जैसे त्योहारी मौसम से पहले।
GST सुधारों की दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से GST ढांचे में सुधार की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य टैक्स स्लैब को सरल करना और आम लोगों की जेब पर बोझ कम करना है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 12 % और 28 % के स्लैब को खत्म करने की योजना है। इसके तहत चॉकलेट, आइसक्रीम, पेस्ट्री, और अन्य खाद्य उत्पादों को 5 फीसदी स्लैब में लाया जाएगा। यह बदलाव 3 और 4 सितंबर को होने वाली GST काउंसिल की 56वीं बैठक में अंतिम रूप ले सकता है, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
आम लोगों को लाभ
इस सुधार से रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम होने की संभावना है। चॉकलेट, आइसक्रीम, और ब्रांडेड मिठाइयों के अलावा, टेक्सटाइल और अन्य खाद्य उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 12 फीसदी स्लैब में आने वाली वस्तुओं को 5 फीसदी में लाने से मध्यम वर्ग को त्योहारी खरीदारी में राहत मिलेगी। इसके अलावा, कुछ जरूरी सामान जैसे दूध, पनीर, और रोटी को जीरो GST स्लैब में शामिल करने की बात भी चल रही है, जिससे ग्रामीण और निम्न आय वर्ग को अतिरिक्त फायदा होगा।
सरकार की रणनीति
GST काउंसिल की बैठक से पहले 2 सितंबर को नई दिल्ली में अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श होगा। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बनी मंत्रियों की समिति ने दो स्लैब (5% और 18%) की संरचना को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव से सरकार का मकसद टैक्स ढांचे को सरल करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने माना है कि इससे केंद्र और राज्य सरकारों की आय पर कुछ असर पड़ सकता है। फिर भी, यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने और मध्यम वर्ग को सहूलियत देने के लिए उठाया जा रहा है।
GST सुधारों को लागू करने की समयसीमा दिवाली से पहले तय की गई है। यह कदम 2017 में GST लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल उपभोक्ताओं को फायदा होगा, बल्कि व्यवसायों के लिए टैक्स प्रक्रिया भी आसान होगी। साथ ही, सरकार ने GST रिटर्न और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव भी रखा है।
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