एक नई किताब में, एक वेलनेस कोच का तर्क है कि भाग नियंत्रण एक अच्छे आहार का ‘अंजाना नायक’ है

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    सेहतमंद जीवनशैली अपनाने के लिए सही आहार का होना बेहद आवश्यक है, जिसमें भाग नियंत्रण (पोर्टियन कंट्रोल) की भूमिका निहायत अहम मानी जाती है। कई बार जब स्वादिष्ट भोजन सामने होता है तो इसे रोक पाना कितना मुश्किल हो जाता है, यही असली चुनौती है। स्वस्थ रहने के लिए यह समझना आवश्यक है कि हमें अपने खाने की मात्रा पर नियंत्रण रखना होगा।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि भोजन के तुरंत बाद अत्यधिक खाने की इच्छा को रोकना सबसे बड़ी कुंजी है। स्वयं को याद दिलाएं कि कल भी खाने को मिलने का मौका है, पूरी थाली एक बार में खत्म करने की आवश्यकता नहीं है। अस्थायी खुशी के लिए अधिक खाना लंबी अवधि की असुविधा और अतिरिक्त वजन से बेहतर नहीं है।

    वैज्ञानिक शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जो व्यक्ति प्राकृतिक रूप से पतले रहते हैं, वे सामान्यतः तभी भोजन करना बंद कर देते हैं जब वे लगभग 80% तृप्त होते हैं। यह आदत धीरे-धीरे उनका वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है।

    यह सिद्धांत केवल किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं है। जापानी परंपरा में ‘हारा हाची बु’ का सिद्धांत है, जिसमें भोजन तब तक किया जाता है जब तक पेट 80% भरता है। आयुर्वेद में भी इसे महत्व देते हुए सलाह दी गई है कि पेट का एक-तिहाई हिस्सा खाली रखा जाए जिससे पाचन बेहतर होता है।

    मेडिटेरेनियन क्षेत्रों में लोगों के भोजन करने का तरीका भी बहुत प्रेरणादायक है, जहां भोजन की मात्रा सामान्यत: कम होती है और भोजन आनंद तथा सामाजिक संपर्क के साथ धीरे-धीरे किया जाता है। ये सभी उदाहरण हमें संयम और भाग नियंत्रण की महत्ता बताते हैं जो कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक है।

    इस तरह, आहार में भाग नियंत्रण को अपनाकर न सिर्फ वजन नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने और बेहतर जीवनशैली जीने में भी मदद मिलती है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना आज के समय की जरूरत है।

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