सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस द्वारा दायर मामले में अग्रिम जमानत प्रदान की। इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय ने औपचारिक सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने 24 अप्रैल को गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इंकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए खेड़ा की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जाली दस्तावेज बनाने और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया है।
रिनिकी भुयान सरमा ने यह शिकायत उस वक्त दर्ज कराई जब पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को दावा किया था कि उनके पास संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ व बारबुडा के पासपोर्ट की दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इस दावे को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि ये आरोप झूठे हैं और खेड़ा के पासपอร์ต से जुड़े दस्तावेज जाले हैं।
10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जो कि गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा प्रदान करती है ताकि आरोपी उस राज्य में मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट का रुख कर सके जहां केस दर्ज हुआ है।
फिर 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को स्थगित कर दिया और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अर्जी लगाने का निर्देश दिया।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने पुनः सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत मिलने के बाद पवन खेड़ा की गिरफ्तारी से फिलहाल बचाव हो गया है। मामले की आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि दस्तावेजों की पुष्टि कैसे होती है और आरोपों की सच्चाई क्या है।
यह मामला असम में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री के परिवार का नाम जुड़ा है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इस मामले में ठोस निष्कर्ष आना बाकी है।
पवन खेड़ा ने अपनी सफाई में कहा है कि उनके दावे तथ्य आधारित हैं और उनका मकसद केवल सार्वजनिक हित में सच्चाई सामने लाना था। दूसरी तरफ, सरकार पक्ष ने आरोप लगाया है कि ऐसी झूठी बातें फैला कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला आगामी दिनों में और भी कई मोड़ों से गुजर सकता है, जिससे हर राजनीतिक और कानूनी नजर इस पर बनी रहेगी।
अधिक जानकारी और अपडेट के लिए बने रहें।

