भारत के पवन खेत चमगादड़ों के लिए खतरा बना सकते हैं: वन्यजीव विशेषज्ञ

Rashtrabaan

    भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही पवन ऊर्जा केंद्रों से चमगादड़ों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। विश्व स्तर पर हर साल लाखों चमगादड़ पवन टरबाइन से टकराकर मारे जाते हैं, जो जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है।

    विश्व प्रवासी जीव संरक्षण सम्मेलन (CMS) के 2025 के तथ्य पत्रक के अनुसार, चमगादड़ प्रजातियां अनेक खतरों का सामना कर रही हैं, जिनमें आवासीय क्षेत्रों का विनाश, कृषि विस्तार, शिकार, शहरीकरण, ऊर्जा उत्पादन और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। विदेशी और घरेलू शोधों में यह बात सामने आई है कि जलवायु समाधान के उपाय, जैसे पवन ऊर्जा के बुनियादी ढांचे, जैव विविधता को अप्रत्यक्ष रूप से क्षति पहुँचा सकते हैं, लेकिन इस खतरे पर कम ही ध्यान दिया गया है।

    हाल ही में जारी “इंडियन बैट्स की स्थिति” रिपोर्ट में भी पवन टरबाइनों को चमगादड़ों के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा बताया गया है। शोधकर्ताओं की मानें तो भारत में चमगादड़ों के प्रति पवन ऊर्जा केंद्र किस हद तक नुकसानदेह हैं, यह अभी पूरी तरह से समझा नहीं गया है। रोहित चक्रवर्ती, एक प्रमुख चमगादड़ विशेषज्ञ, कहते हैं कि तीन मुख्य डेटा अंतर मौजूद हैं – कौन सी प्रजातियां सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं, मृत्युदर कितनी है, और क्या इस मृत्युदर में मौसमी बदलाव आते हैं।

    भारत में लगभग 135 चमगादड़ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो विश्व की चमगादड़ों की कुल विविधता का लगभग 10% हैं। इनमें से लगभग सोलह प्रजातियां केवल भारत में ही पाई जाती हैं। बैट कंजर्वेशन इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 122 प्रजातियों में से केवल 23% की जनसंख्या स्थिर है, जबकि अधिकांश की संख्या घट रही है।

    टकराव के कारण क्या हैं?

    शोध से पता चलता है कि चमगादड़ों का पंख पवन टरबाइन की गति से प्रभावित होकर टकराव होता है, खासकर तब जब वे अपने प्राकृतिक आवास से होकर उड़ रहे होते हैं। टरबाइनों के प्रकाश और शोर के कारण भी चमगादड़ों की उड़ान प्रभावित होती है, जिससे टकराव की घटनाएं बढ़ जाती हैं। पवन खेतों के आसपास का पर्यावरण और स्थान चयन भी अहम भूमिका निभाते हैं।

    इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ बेहतर निगरानी और अनुसंधान की जरूरत बताते हैं, ताकि चमगादड़ों पर पवन ऊर्जा के प्रभाव को समझा जा सके और उनकी रक्षा के लिए रणनीतियां विकसित की जा सकें। इसके साथ ही, भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के स्थायी विकास के लिए जैव विविधता संरक्षण पर भी जोर देना आवश्यक है।

    विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि चमगादड़ और अन्य वन्यजीव सुरक्षित रहें और साथ ही भारत की ऊर्जा जरूरतें भी पूरी हों।

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