रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस शुक्रवार एक भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें राज्य के सभी जिलों से 2,300 से अधिक जोड़े शादी के पवित्र बंधन में बंधेंगे। यह आयोजन मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत संपन्न हो रहा है, जो विभिन्न धर्म और समुदायों के प्रतिनिधित्व को समेटे हुए है।
इस साल की इस महाआयोजित शादी में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और आदिवासी समुदाय के जोड़े अपनी-अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ शामिल होंगे। यह पहल सामाजिक एकता और विविधता में सामंजस्य स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कार्यक्रम को सामाजिक समरसता, गरिमा और सम्मान का प्रतीक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस योजना की सफलता का प्रमाण पिछले साल के राज्य स्तरीय समारोह में देखने को मिला था, जहां रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 6,412 जोड़ों की एक साथ शादी हुई थी, जिसे ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में सम्मिलित किया गया। मुख्यमंत्री स्वयं हजारों जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए नजर आए थे, जिसमें कई जोड़े अपनी-अपनी जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।
छत्तीसगढ़ की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शादी के समारोह में ना केवल आर्थिक सहायता दी जाती है, बल्कि जोड़ों को आवश्यक गृहस्थी सामान भी प्रदान किया जाता है ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन की शुरुआत कर सकें।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत 2006 में हुई थी, जिसके अंतर्गत हर नवविवाहित जोड़े को 35 हजार रुपए की सहायता राशि तथा विवाह समारोह के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुई है।
इस योजना के तहत केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत करने वाले ही नहीं, अपितु विधवाओं, अनाथों और बेसहारा महिलाओं को भी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे समाज के हर वंचित वर्ग को इसका लाभ मिल सके। पात्रता का निर्धारण मुख्यमंत्री खाद्य योजना से जारी राशन कार्ड के आधार पर किया जाता है।
प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने उच्चस्तरीय व्यवस्थाएं की हैं ताकि इस समारोह में शामिल जोड़ों और उनके परिवारों को आरामदायक और सम्मानजनक अनुभव प्राप्त हो। सभी जिलों में प्रशासनिक टीम अंतिम तैयारियों में जुटी है ताकि यह आयोजन सफल और स्मरणीय बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना बेटियों की शादी को किसी भी आर्थिक बाधा से मुक्त कर, उनकी गरिमा बनाए रखने का प्रयास है। उनका यह भी कहना है कि इस तरह के सामूहिक विवाह समारोह न केवल खर्च कम करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता भी बढ़ाते हैं और पारंपरिक बंधनों को मजबूत करते हैं।
इस शुक्रवार के कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ एक बार फिर सामाजिक समावेशन और कल्याणकारी नीतियों के मामले में मिसाल कायम करेगा तथा राज्य की पहचान को और अधिक मजबूती देगा।

