कोरबा, राष्ट्रबाण: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में एक गाय बिना बछड़े को जन्म दिए रोजाना 5 लीटर दूध दे रही है, जिसे ग्रामीण पौराणिक ‘कामधेनु’ का अवतार मानकर पूजा कर रहे हैं। यह असाधारण घटना स्थानीय लोगों में आस्था और कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। ग्रामीणों का विश्वास है कि यह गाय जिस घर में रहेगी, वहाँ सुख-समृद्धि की कमी नहीं होगी। इस खबर ने जंगल की आग की तरह क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, और लोग इसे दैवीय चमत्कार मान रहे हैं।
गाय की अनोखी कहानी
दीपका के धनंजय सिंह कोल, जो मवेशी पालते हैं, ने बताया कि उनकी 3 साल की गाय, जिसने कभी बछड़ा नहीं दिया, के थनों से कुछ दिनों पहले दूध टपकता दिखा। शुरू में इसे सामान्य समझा गया, लेकिन जब यह सिलसिला रोजाना जारी रहा, तो उन्होंने दूध निकालना शुरू किया। गाय सुबह-शाम कुल 5 लीटर दूध दे रही है, जो सामान्य रूप से केवल गर्भधारण के बाद ही संभव होता है। धनंजय के अनुसार, इस गाय की खासियत जानकर आसपास के लोग उनके घर आने लगे और इसे ‘कामधेनु’ का रूप मानकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
आस्था और चमत्कार का संगम
हिंदू पुराणों में कामधेनु को एक दैवीय गाय माना जाता है, जो समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी और सभी इच्छाएँ पूरी करती है। ग्रामीण इसे उसी का अवतार मान रहे हैं। धनंजय के घर रोजाना लोग इस गाय के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं, और इसे शुभ मानकर पूजा कर रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रकृति का दुर्लभ खेल मानते हैं, लेकिन स्थानीय समुदाय इसे आध्यात्मिक चमत्कार मानकर उत्साहित है। यह खबर कोरबा से बाहर भी फैल रही है, और लोग इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक मान रहे हैं।
वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण
पशु चिकित्सकों का कहना है कि बिना गर्भधारण के दूध देना अत्यंत दुर्लभ है और यह हार्मोनल असंतुलन या विशेष शारीरिक स्थिति का परिणाम हो सकता है। हालांकि, ग्रामीण इस वैज्ञानिक व्याख्या से अधिक आस्था पर भरोसा कर रहे हैं। यह घटना छत्तीसगढ़ में गायों के प्रति गहरी सांस्कृतिक श्रद्धा को दर्शाती है। पहले भी अयोध्या (2009-2022) और झारखंड (2005 से) में ऐसी गायों की खबरें सामने आई थीं, जिन्हें कामधेनु माना गया।
सामाजिक प्रभाव और चर्चा
यह घटना न केवल कोरबा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बनी है। सोशल मीडिया पर लोग इसे चमत्कार मानकर साझा कर रहे हैं, और कुछ इसे पर्यटन और धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि गाय की स्वास्थ्य जाँच होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि दूध देना उसके लिए हानिकारक तो नहीं। यह घटना गायों के प्रति भारतीय संस्कृति में गहरे विश्वास और आधुनिक विज्ञान के बीच टकराव को भी उजागर करती है।
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