लग्जरी और सिन गुड्स पर GST बढ़ाने की तैयारी मोदी सरकार का 40% से अधिक टैक्स का प्लान

Rahul Maurya

नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: केंद्र की मोदी सरकार एक बड़े टैक्स सुधार की ओर बढ़ रही है, जिसमें लग्जरी वस्तुओं और ‘सिन’ गुड्स, जैसे शराब, तंबाकू, और पान मसाला, पर माल एवं सेवा कर (GST) की दर को 40 प्रतिशत से ऊपर ले जाने की योजना है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी खजाने को मजबूत करना और हानिकारक उत्पादों की खपत को कम करना है। साथ ही, सरकार रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं पर GST स्लैब को सरल बनाकर 5 और 18 प्रतिशत तक सीमित करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव 3-4 सितंबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा का प्रमुख विषय हो सकता है। इस बदलाव से आम आदमी को सस्ती वस्तुओं का लाभ मिलने की उम्मीद है, जबकि महंगी कारें, आभूषण और शराब जैसी चीजें और महंगी हो सकती हैं।

GST स्लैब में सुधार की जरूरत

वर्तमान GST ढांचा चार स्लैब—5, 12, 18 और 28 प्रतिशत—पर आधारित है, जिसमें कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त मुआवजा उपकर भी लगता है। इस जटिल व्यवस्था ने कई बार भ्रम पैदा किया है, जैसे पिछले साल कारमेल पॉपकॉर्न और नमकीन पॉपकॉर्न के अलग-अलग टैक्स स्लैब को लेकर हुई उलझन। अब सरकार इस ढांचे को सरल करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्ताव के तहत, 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब में शामिल ज्यादातर वस्तुएं क्रमशः 5 और 18 प्रतिशत के स्लैब में आ सकती हैं। इससे छोटी कारें, घरेलू उपकरण और रोजमर्रा की जरूरी चीजें सस्ती हो सकती हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स के लिए 40 प्रतिशत का नया स्लैब प्रस्तावित है, जिससे शराब, सिगरेट और लक्जरी गाड़ियों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

राजस्व बढ़ाने और सामाजिक सुधार का लक्ष्य

लग्जरी और सिन गुड्स पर टैक्स बढ़ाने का यह कदम न केवल सरकारी राजस्व को बढ़ाएगा, बल्कि तंबाकू और शराब जैसे हानिकारक उत्पादों की खपत को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सुधार से मिलने वाला अतिरिक्त राजस्व बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं में निवेश किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को कम करने में भी कारगर होगा। हालांकि, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है और सिन गुड्स पर और भी ऊंची दरों की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार वैश्विक व्यापारिक तनावों, खासकर अमेरिका के साथ बढ़ते टैरिफ विवादों, को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

GST काउंसिल की बैठक में अंतिम निर्णय

आगामी 3-4 सितंबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव पर गहन चर्चा की उम्मीद है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में मुआवजा उपकर, बीमा प्रीमियम पर GST, और टैक्स स्लैब को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। कुछ राज्यों ने सुझाव दिया है कि सिन गुड्स पर ऊंची टैक्स दरों से स्वास्थ्य और सामाजिक जोखिमों को कम करने के लिए फंड जुटाया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह 2017 में GST लागू होने के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार होगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को राहत देगा और अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने में मदद करेगा।

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