भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत की रहस्यमय कहानी में नया मोड़: प्रेग्नेंसी और कोर्ट की दावों ने बढ़ाया सवाल

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    भोपाल/नोएडा। ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब आत्महत्या या दहेज प्रताड़ना तक सीमित नहीं रह गया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत ऐसे कई खुलासों के साथ सामने आई है, जिसने पूरे मामले को और जटिल कर दिया है। एक तरफ मायके पक्ष इसे सुनियोजित हत्या और मानसिक तनातनी का मामला बता रहा है, वहीं ससुराल पक्ष के कोर्ट में दिए गए दावे जांच की दिशा पर सवाल उठा रहे हैं।

    शादी, रिश्तों की शुरुआत और तनाव

    ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के एडवोकेट समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं, जो इस मामले को अधिक संवेदनशील बनाता है। परिवार के अनुसार, ट्विशा और समर्थ की मुलाकात मैट्रिमोनियल वेबसाइट और डेटिंग ऐप के माध्यम से हुई। प्रारंभिक समय में सब सामान्य था, लेकिन कुछ महीनों बाद रिश्ते तनावपूर्ण हो गए। मायके पक्ष का आरोप है कि ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उन पर दबाव बढ़ा।

    12 मई की रात: शव फांसी से लटका मिला

    12 मई की रात ट्विशा अपने भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फांसी पर लटकी मिलीं। तत्कालीन जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने इसे हत्या और दहेज उत्पीड़न का मामला कहा। इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी मचा दी।

    डिजिटल सबूत और आखिरी संदेश

    मृत्यु से पहले ट्विशा ने एक इंस्टाग्राम चैट में अपनी दोस्त से लिखा था कि “मैं फंस गई हूं… ज्यादा बात नहीं कर सकती”। उनसे कॉल का वादा भी था जो नहीं हुआ। परिवार ने बताया कि ट्विशा ने आखिरी बार मौत से मिनटों पहले मां और भाई से बात की थी और वो बेहद परेशान थीं। वे भोपाल छोड़कर नोएडा लौटने की तैयारी में थीं तथा टिकट बुक कर चुकी थीं।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौकाने वाले तथ्य

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आया कि ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थीं। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि उनके MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) हुई थी, जो उनकी मृत्यु से लगभग एक सप्ताह पहले थी। शरीर पर कई चोटों के निशान मिले, जिनका कारण मौत से पूर्व हुई हिंसा की आशंका जताई गई है।

    मायके पक्ष के गंभीर आरोप

    ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के बाद समर्थ सिंह की माँ एवं ससुराल पक्ष ने लगभग 20 लाख रुपये के शेयर और निवेश समर्थ के नाम करने का दबाव बनाया। गर्भावस्था के दौरान ट्विशा के चरित्र पर सवाल उठाए गए और उनकी MTP प्रक्रिया उनकी इच्छा के खिलाफ कराई गई। परिवार को न्याय के लिए थानों, महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    ससुराल पक्ष का जवाब और कोर्ट के दावे

    ससुराल पक्ष ने दावा किया कि ट्विशा ड्रग्स की लती थीं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी काउंसलिंग चल रही थी। कोर्ट में उन्होंने यह भी कहा कि ट्विशा को नियमित आर्थिक सहायता दी जाती थी, जिसका बैंक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किया गया। साथ ही यह भी बताया कि ट्विशा एक बार 12 घंटे तक लापता रहीं, उनका ठिकाना साफ नहीं था।

    व्यक्तित्व और पेशेवर जीवन

    ट्विशा का करियर भी प्रभावशाली रहा। उन्होंने तेलुगु फिल्मों और मॉडलिंग में काम किया, फिर एमबीए कर दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में नौकरी की। परिवार के अनुसार, वह स्वतंत्र और महत्वाकांक्षी महिला थीं।

    जांच में बाधाएं और उच्चस्तरीय दबाव

    परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली परिवार होने के कारण जांच धीमी हो रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अधीन सीबीआई जांच और AIIMS में पुनः पोस्टमार्टम की मांग की है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है, लेकिन दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावे मामले को और पेचीदा बना रहे हैं।

    मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन

    ट्विशा के परिवार ने मुख्यमंत्री भवन के सामने प्रदर्शन किया और दावा किया कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। पिता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आत्मदाह करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि मामले में शीघ्र पुलिस और न्यायालय द्वारा स्पष्टता आएगी।

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