मुंबई। मीरा रोड के नयानगर में हाल ही में हुई चाकू से हमला की घटना ने पूरे महाराष्ट्र में सियासी हलचल मचा दी है। जुबेर अंसारी द्वारा सुरक्षा गार्ड राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो पर हमला किया गया था। यह हमला उस समय और भी गंभीर हो जाता है जब यह पता चलता है कि जुबेर ने हिन्दू होने के कारण और कलमा न पढ़ पाने की वजह से यह हिंसक कदम उठाया। इस घटना ने इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया है।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी हिंसा बिल्कुल अस्वीकार्य है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि जुबेर जैसे लोगों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना बेहद आवश्यक है ताकि इलाके में शांति कायम रहे। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ तत्व जानबूझकर क्षेत्र में सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नितेश राणे ने कहा, “मैं हमेशा से कहता आया हूँ कि मीरा रोड के नयानगर के लोग जिहादियों की तरह हैं, जो इसे एक छोटा पाकिस्तान बनाना चाहते हैं। इसीलिए यहां लव जिहाद और लैंड जिहाद के मामले सामने आते रहते हैं। जब पिछले पहलगाम हमले के समय लोगों ने कलमा पढ़ना और सिंदूर लगाना देखा, तब से यह स्पष्ट है कि इस इलाके में जिहादी मानसिकता को खत्म करना आवश्यक है।” उन्होंने आगे कहा कि “जैसे पाकिस्तान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया, वैसे ही नया नगर में भी ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने का वक्त आ गया है।”
दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय में आरएसएस के कार्यक्रम के विरोध पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने विरोधियों की आलोचना करते हुए ऐसे राष्ट्रवादी कार्यक्रमों का समर्थन किया। राणे का कहना है कि “हमारा देश एक हिंदू राष्ट्र है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश में राष्ट्रवाद का वास्तविक उदाहरण है। यह संगठन 100 वर्ष पुराना है और आज इसके माध्यम से ही सही अर्थों में राष्ट्रवाद दिखता है।”
जुबेर अंसारी की इस कायराना हरकत की जांच अब एटीएस के सुपुर्द कर दी गई है। एटीएस ने जुबेर के घर की तलाशी दौरान आईएसआईएस, इस्लामिक तथा लोन वुल्फ जैसे उग्रपंथी विचारों से जुड़ा साहित्य भी बरामद किया है। वहीं जुबेर के माता-पिता फिलहाल अमेरिका में हैं और सरकार उनके बारे में आधिकारिक जानकारी एंबेसी से प्राप्त कर रही है।
यह मामला न केवल मीरा रोड के स्थानीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है, बल्कि महाराष्ट्र और देशभर में साम्प्रदायिक सौहार्द और सुरक्षा के लिए भी चुनौती बना हुआ है। इसे लेकर समुचित कार्रवाई तथा सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले तत्वों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और उनके विरुद्ध सख्त कदम उठाना आवश्यक है।

