राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को यह स्पष्ट किया कि RSS और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच किसी तरह का कोई विवाद या मतभेद नहीं है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों संगठन राष्ट्रीय हित में एकसाथ मिलकर काम करते हैं। यह बयान उन अटकलों को खारिज करता है, जो हाल के महीनों में RSS और BJP के बीच तनाव की बात कह रही थीं। भागवत ने यह भी जोड़ा कि RSS सरकारों को सलाह दे सकता है, लेकिन अंतिम फैसला BJP का होता है।
भागवत का बयान
नई दिल्ली में RSS की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक व्याख्यानमाला के समापन सत्र में भागवत ने कहा कि दोनों संगठनों के बीच समन्वय बेहतर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS और BJP के लक्ष्य एक जैसे हैं, और दोनों देश के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। भागवत ने कहा कि कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यह विचारों का अंतर है, न कि व्यक्तिगत मनमुटाव। उन्होंने यह भी बताया कि RSS केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अच्छा तालमेल बनाए रखता है, और यह समन्वय केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं है।
BJP की स्वायत्तता पर जोर
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS का काम सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में है, जबकि BJP का क्षेत्र राजनीति है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि RSS शाखाएँ चलाने में विशेषज्ञ है, जबकि BJP सरकार चलाने में। इसलिए, RSS केवल सुझाव देता है, और अंतिम निर्णय BJP पर छोड़ता है। भागवत ने BJP के नए अध्यक्ष के चयन में देरी के सवाल पर भी टिप्पणी की और कहा कि अगर RSS सब कुछ तय करता, तो इतना समय नहीं लगता। उन्होंने BJP को स्वतंत्रता के साथ फैसले लेने की सलाह दी।
अटकलों का जवाब
हाल के महीनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी दलों ने RSS और BJP के बीच तनाव की बात कही थी। खासकर, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद RSS के कुछ बयानों को BJP के खिलाफ माना गया था। लेकिन भागवत ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि RSS और BJP एक वैचारिक परिवार का हिस्सा हैं, और दोनों का उद्देश्य देश की प्रगति है। RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने भी हाल ही में कहा था कि दोनों संगठनों के बीच समन्वय की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।
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