पश्चिम बंगाल में चुनाव से एक दिन पहले 1,468 मतदाताओं को मतदाता सूची में पुनः शामिल किया गया है, जिससे उनके मतदान करने का मार्ग खुल गया है। यह कदम विशेष तीव्र संशोधन प्रक्रिया के तहत स्थापित अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा लिया गया है।
दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह निर्णय आयोग के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है कि कितनी जल्दी विभिन्न शिकायतों का निपटारा किया जाए। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने यह बताया था कि पश्चिम बंगाल के 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों को कुल 34 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 7 लाख आवेदन नामांकन को रोकने के लिए और 27 लाख आवेदन नाम हटाए जाने के खिलाफ थे।
इन अपीलों के निपटारे से कई मतदाताओं को फ़ायदा पहुंचा है और उन्हें मतदान के लिए पात्र माना गया है। यह मतदाता बुधवार को अपने मतदान केंद्रों पर जाकर भाग ले सकेंगे।
वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया है कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वरना कांता शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से हाजिरी नहीं देंगे। यह अदालत केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें सिसोदिया और दूसरों को शराब नीति मामले में बरी किए जाने की चुनौती दी गई है।
यह निर्णय पार्टी प्रमुख arvind kejriwal द्वारा न्यायाधीश शर्मा के समक्ष उपस्थित न होने के ऐलान के एक दिन बाद आया है। उनका कहना है कि वे भी इस मामले में कोर्ट में पेश नहीं होंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इन घटनाओं ने पश्चिम बंगाल चुनाव के माहौल को और जटिल बना दिया है। मतदाता सूची में हो रहे बदलावों और नेताओं के कानूनी विवादों के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है।
भ्रष्टाचार, वाद-विवाद और कानूनी जटिलताओं के बीच जनता का जनादेश लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है, और इसे सक्षम बनाने के लिए आवश्यक है कि सभी क्षेत्रों में फैले प्रक्रियागत अड़चनों को दूर किया जाए।

