Stock Market Crash: अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लागू करने की घोषणा ने भारतीय शेयर बाजार को हिलाकर रख दिया है। गुरुवार को बाजार खुलते ही भारी गिरावट देखने को मिली, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गोता लगाते नजर आए। इस हादसे ने निवेशकों को गहरे झटके दिए हैं, और कई सेक्टर्स के शेयरों में भारी नुकसान दर्ज किया गया। यह गिरावट मंगलवार को शुरू हुई थी और अब इसका असर और गहरा हो गया है।
बाजार में भारी उथल-पुथल
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक खुलते ही 635 अंक लुढ़क गया और 80,155 के स्तर पर पहुँच गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 180 अंक से ज्यादा टूटकर 24,531 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका का भारत पर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ है, जिसने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस टैरिफ की घोषणा के बाद निवेशकों में डर का माहौल है, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। खास तौर पर, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी नुकसान देखा गया।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित?
इस हादसे का असर कई प्रमुख सेक्टर्स पर पड़ा है। आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि ये कंपनियाँ अमेरिकी बाजार पर बहुत हद तक निर्भर हैं। इसके अलावा, बैंकिंग शेयर भी बिकवाली के दबाव में टूट गए। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के इस कदम से भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, खासकर उन उद्योगों को जो अमेरिका के साथ बड़ा व्यापार करते हैं। इस गिरावट ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है, और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
वैश्विक व्यापार पर असर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की नीति अपनाई है। इसका मकसद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है, लेकिन इसने वैश्विक व्यापार में तनाव पैदा कर दिया है। भारत के लिए यह टैरिफ विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि देश का निर्यात क्षेत्र पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी होगी, जैसे कि यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया, ताकि इस नुकसान की भरपाई की जा सके।
निवेशकों के लिए चुनौती
बाजार में इस गिरावट ने निवेशकों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्थिरता कुछ समय तक जारी रह सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने पोर्टफोलियो की सावधानी से जाँच करें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भी बाजार को स्थिर करने के लिए कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
ट्रंप के टैरिफ ने भारतीय शेयर बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी की इस गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यह समय भारत के लिए अपनी व्यापार नीतियों पर पुनर्विचार करने का है, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना किया जा सके। बाजार में स्थिरता कब लौटेगी, यह देखना बाकी है।
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