तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावों में रिकॉर्ड मतदान हुआ है, जो चुनाव आयोग के लिए गर्व का विषय बना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि इन दोनों राज्यों में मतदान प्रतिशत अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँचा है। उन्होंने मतदाताओं को सलाम करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की मजबूत पहचान और जनता की पूरी भागीदारी का परिचायक है।
चुनाव आयोग के अनुसार, तमिलनाडु में इस चुनाव में 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक मतदान दर है। यह आंकड़ा पिछले चुनावों की तुलना में काफी उच्च है और इससे स्पष्ट होता है कि जनता ने अपनी भूमिका बड़ चाव से निभाई है। पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की उच्च मतदान दर दर्ज की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने बयान में कहा, “इस तरह की सहयोगात्मक भागीदारी से चुनाव प्रक्रिया की विश्रामता और पारदर्शिता में वृद्धि होती है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने मतदाताओं की जागरूकता और चुनाव अधिकारियों के किए गए प्रभावी इंतजामों की भी प्रशंसा की।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी उच्च मतदान दर का सबसे बड़ा कारण चुनाव आयोग द्वारा किए गए व्यापक टीकाकरण और सुरक्षा प्रबंध हैं। कोविड-19 महामारी के बाद भी मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने आए, जिससे यह साबित होता है कि जनता लोकतंत्र को मजबूत बनाने को गंभीरता से देखती है।
चुनाव के दौरान सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया और मतदाता केंद्रों पर साफ-सफाई तथा सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा गया। आयोग ने यह भी अपील की कि भविष्य में भी सभी नागरिक मतदान करने के लिए आगे आएं और लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
इस तरह के उत्साहपूर्ण मतदान ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों को न सिर्फ सफल बनाया है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल भी स्थापित की है। चुनाव आयोग का मानना है कि मजबूत लोकतंत्र के लिए मतदाता की भागीदारी सर्वोपरि है और इस कदम से आने वाले चुनावों में और अधिक सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद है।

