​MP News : खाकी पर हमले के 15 दिन बाद ही फिर जारी हुआ रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन

Rashtrabaan
Highlights
  • प्रधान आरक्षक लड़ रहा जिंदगी की जंग, रात के अंधेरे में बेखौफ हो रहा अवैध उत्खनन
  • ​प्रशासन के दावों की खुली पोल लालबर्रा में रात 11 से सुबह 6 बजे तक धड़ल्ले से दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्राली, शिकायतकर्ता के नाम भी हो रहे लीक

    बालाघाट। जिले में कानून व्यवस्था और प्रशासन के सम्मान पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। बीते 26 मई को कर्तव्य निर्वहन के दौरान रेत कारोबारी के दुस्साहस का शिकार हुए लालबर्रा थाने के प्रधान आरक्षक राजेश्वर राहंगडाले वर्तमान में दिल्ली (गुरुग्राम) के मेदांता अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली वारदात को अभी महज 12 से 15 दिन भी नहीं बीते हैं कि लालबर्रा क्षेत्र के पोटियापाट, अमोली, देवरी और पनबिहरी में सर्राटी नदी से रात के अंधेरे में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन फिर से पूरी रफ्तार से शुरू हो चुका है। घायल हेड कांस्टेबल के अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष करने के बीच, रेत कारोबारियों द्वारा अपने अवैध धंधे को दोबारा ढर्रे पर लाना प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है।

    प्रधान आरक्षक पर हुए जानलेवा हमले के बाद पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने शुरुआती कुछ दिनों तक अवैध भंडारण और परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई का दिखावा तो किया, लेकिन जैसे ही मामला शांत हुआ, विभाग फिर कुंभकर्णी नींद सो गए। स्थिति यह है कि लालबर्रा क्षेत्र में विगत एक सप्ताह से रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक बेखौफ होकर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इतनी बड़ी वारदात के बाद भी रेत कारोबारियों के इस दुस्साहस ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। अब जनता के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर चंद दिनों के भीतर ही ये रेत कारोबारी इस कदर बेखौफ कैसे हो गए…? क्या इन्हें कानून का कोई डर नहीं है, या फिर इस खेल को प्रशासन की मौन स्वीकृति मिली हुई है….?

    इस पूरे अवैध कारोबार में प्रशासनिक तंत्र की संलिप्तता का सबसे हैरान करने वाला पहलू भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि कोई जागरूक नागरिक इस अवैध उत्खनन की सूचना संबंधित विभाग या अधिकारियों को देता है, तो तंत्र के भीतर बैठे विभीषण रेत कारोबारियों को सूचना देने वाले का नाम तक लीक कर देते हैं। जानकारी लगने से रेत कारोबारी सतर्क हो जाते हैं, और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाना चालू कर देते हैं, प्रधान आरक्षक के जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बीच रसूखदार रेत कारोबारी और विभागीय सांठगांठ ने स्थानीय जनता के भरोसे को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।

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