हैदराबाद, राष्ट्रबाण। तेलंगाना विधानसभा (Telangana Legislative Assembly) ने रविवार को तेलंगाना म्यूनिसिपलिटी (तृतीय संशोधन) (Telangana Municipality) विधेयक 2025 और तेलंगाना पंचायतराज (तृतीय संशोधन) विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इन विधेयकों के जरिए शहरी और ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग (बीसी) को 42 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।
विधानसभा में हुई संक्षिप्त लेकिन तीखी बहस के दौरान सत्ता पक्ष कांग्रेस (Congress) और मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने एक-दूसरे पर बीसी आरक्षण को लागू न करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) ने पूर्व बीआरएस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने कुल आरक्षण को 50% सीमा में लाने के लिए बीसी आरक्षण को घटा दिया था। वहीं, बीआरएस नेता के. टी. रामाराव ने कांग्रेस सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर संसद में क्यों खामोश हैं।
दूसरे दिन सदन में सरकार ने 42% बीसी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए दो संशोधन विधेयक पेश किए। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोनम प्रभाकर ने कहा कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी वर्ग को 42% आरक्षण लागू किया जाएगा।
बीआरएस विधायक गंगुला कमलाकर (Gangula Kamlakar) ने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर नहीं है और पूछा कि मार्च में शिक्षा, नौकरियों व स्थानीय निकायों में 42% बीसी आरक्षण के लिए पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाने हेतु सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली क्यों नहीं भेजा गया।
बहस में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बीआरएस पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार के समय बनाए गए पंचायतराज अधिनियम 2018 और नगरपालिका अधिनियम 2019 ही 50% से अधिक आरक्षण का रास्ता रोकने वाली सबसे बड़ी बाधा हैं।
रेवंत रेड्डी ने बताया कि मार्च में पारित दोनों विधेयक पिछले पांच महीने से राष्ट्रपति के पास लंबित हैं। राज्य सरकार ने 42% बीसी आरक्षण लागू करने के लिए राज्यपाल को अध्यादेश का मसौदा भेजा था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसमें रोड़ा अटकाया।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पांच बार पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने सदन में बीजेपी विधायक दल की नेता पायल शंकर से प्रधानमंत्री से मुलाकात कराने में मदद करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत डेडिकेशन कमीशन का गठन किया गया और उसी के जरिए जाति सर्वेक्षण कराया गया। सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किए गए दोनों विधेयक मार्च में ही पारित किए गए थे।
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