डेब्यू मलयालम शॉर्ट फिल्म ‘सुपरग्लू’ में कला निर्देशन की अनूठी झलक

Rashtrabaan

    डेब्यूटेंट शॉर्ट फिल्म निर्देशक माहिर एम ने हाल ही में अपनी यात्रा और काम के बारे में विस्तार से बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने हिप-हॉप म्यूजिक वीडियो के निर्देशन से अपने करियर की शुरुआत की और फिर फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। माहिर का मानना है कि हिप-हॉप वीडियो बनाना उनके क्रिएटिव सोच को निखारने में अहम भूमिका निभाता है क्योंकि इसमें संगीत, रिदम और विजुअल एलीमेंट्स का बेहतरीन मेल होता है।

    माहिर के अनुसार, हिप-हॉप वीडियो निर्देशन एक चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक अनुभव है क्योंकि इसमें रचनात्मकता की व्यापक गुंजाइश होती है। उन्होंने कहा कि यह उन्हें विजुअल स्टोरीटेलिंग में महारत हासिल करने का अवसर देता है, जो बाद में फिल्मों के निर्देशन में काम आता है।

    डायरेक्शन में माहिर का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि हर फ्रेम को कहानी के साथ पूरी तरह से जोड़ना चाहिए ताकि दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी पहली शॉर्ट फिल्म में उन्होंने ऐसे पहलुओं को प्रमुखता दी जो युवा पीढ़ी के संगीत और शहरी जीवनशैली के लिए प्रासंगिक हों।

    इस नवोदित निर्देशक का मानना है कि फिल्में केवल मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश देने का माध्यम भी हैं। उनकी फिल्मों में जीवन की सच्चाइयों को दिखाने की कोशिश की जाती है, जिसमें कला निर्देशक और छायांकन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    माहिर ने आगे कहा कि शुरुआत में फिल्म बनाना आसान नहीं था, लेकिन हिप-हॉप वीडियो निर्देशन के अनुभव ने उन्हें तकनीकी और रचनात्मक चुनौतियों से लड़ने की ताकत दी। उन्होंने नवोदित फिल्म निर्देशकों को सुझाव दिया कि वे धैर्य रखें और अपनी रचनात्मकता को लगातार बढ़ाते रहें।

    अंत में, माहिर केडल्ड ट्रेंड्स और डिजिटल मीडिया के मिश्रण से होने वाली नई संभावनाओं पर भी बात हुई, जिन्होंने छोटे बजट की फिल्मों को व्यापक दर्शक तक पहुंचाने में मदद की है। उनकी यह यात्रा यह दर्शाती है कि समर्पण और क्रिएटिविटी के जरिए कोई भी युवा निर्देशक अपनी पहचान बना सकता है।

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