लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने नोएडा में बिल्डर्स और खरीदारों के बीच विवादों को जल्द से जल्द सुलझाने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधूरे प्रोजेक्टों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने, डिफाल्टर बिल्डर्स पर कड़ी कार्रवाई करने और सिंगल बिड अलॉटमेंट की जांच कराने का भी आदेश दिया है। मंत्री ने पांच प्रतिशत प्लॉट बैकलॉग को अगले तीन महीनों में समाप्त करने पर जोर दिया है।
मंत्री नंदी ने नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नोएडा को एक व्यवस्थित और विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए व्यापक बदलाव आवश्यक हैं।
उन्होंने बिल्डर्स और फ्लैट खरीदारों की समस्याओं को सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताया और अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करने के निर्देश दिए। अधूरे पड़े प्रोजेक्टों को जल्द पूरा करने और फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि कुल 57 परियोजनाएं इस नीति के अंतर्गत आती हैं, जिनमें से 36 बिल्डर्स ने 25 प्रतिशत रकम जमा कर दी है, जबकि छह बिल्डर्स ने अभी तक कोई भुगतान नहीं किया है। मंत्री नंदी ने कहा कि लोगों की मेहनत की कमाई कई वर्षों से अटकी हुई है और रजिस्ट्री न होने के कारण वे किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
उन्होंने सनसाइन इंफ्रा, महागुन, अंतरिक्ष डेवलपर और परफेक्ट एसोटेक समेत कई बिल्डर्स पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही सिंगल बिड के जरिए हो रहे अलॉटमेंट पर सवाल उठाए और अधिकारियों से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
मंत्री नंदी ने जल आपूर्ति और टॉयलेट रखरखाव के काम को लगातार एक ही फर्म को देने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराने और दोषी पाए जाने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अवैध कब्जे और अवैध निर्माण की गंभीर चिंता जताई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा अवैध कब्जे की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए।
मंत्री ने नोएडा के सभी 168 सेक्टरों में सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने और लापरवाही पर कड़ी जुर्माना लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नोएडा उत्तर प्रदेश का “मुकुट” बन चुका है और उसकी वैश्विक पहचान को मजबूत करने के लिए इसे स्वच्छ, हराभरा और सुंदर बनाना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को पार्कों की स्थिति सुधारने, एंट्री प्वाइंट और सड़कों के किनारे पौधरोपण बढ़ाने तथा इंडस्ट्रियल एरिया में ग्रीनरी अनिवार्य करने के आदेश दिए। हॉर्टिकल्चर विभाग पर वर्ष में 170 करोड़ रुपये खर्च होने की राशि का प्रत्यक्ष असर दिखाना जरूरी बताया।
मंत्री ने जल आपूर्ति और सार्वजनिक शौचालयों की खराब स्थिति पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही पिछले वर्षों में जारी सभी आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) की जांच कराने के निर्देश जारी किए।

