व्हाट्सएप ने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ धोखाधड़ी से जुड़े 9,400 खातों पर लगाया प्रतिबंध, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

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    व्हाट्सएप ने ‘‘डिजिटल गिरफ्तारी’’ नामक धोखाधड़ी से जुड़े 9,400 खातों को प्रतिबंधित कर दिया है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी है। इसके पीछे जनवरी में शुरू हुई एक विस्तृत जांच थी, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार यह कदम कई एजेंसियों के सहयोग से उठाया गया है ताकि प्रतिरूपण आधारित साइबर धोखाधड़ी को रोका जा सके।

    गृह मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि यह एक समन्वित प्रयास था जिसमें विभिन्न सरकारी संस्थान और व्हाट्सएप की टीम ने मिलकर काम किया। व्हाट्सएप ने बताया कि उन्होंने केवल सरकारी एजेंसियों से मिली सूचनाओं पर ही काम नहीं किया, बल्कि वृहद स्तर पर नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म किया।

    सरकारी एजेंसियों ने लगभग 3,800 संदिग्ध खातों को चिन्हित किया था, लेकिन व्हाट्सएप की आंतरिक जांच से करोड़ों उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करने वाले बड़े और संगठित धोखाधड़ी गिरोह का पता चला। इनमें अधिकांश खाते दक्षिण पूर्व एशिया के विशेषकर कंबोडिया के ठग केंद्रों से संचालित हो रहे थे।

    मार्च में वार्ता के दौरान व्हाट्सएप ने एक इंटर-डिपार्टमेंटल समिति को बताया कि उसने कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। इनमें आधिकारिक लोगो के दुरुपयोग को पहचानने वाले सिस्टम, खातों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया, और मशीन लर्निंग मॉडलों का इस्तेमाल शामिल है जो धोखाधड़ी के नए प्रकारों का पता लगाने में सक्षम हैं।

    कंपनी ने उल्लेख किया कि वह एक डेटाबेस बनाकर रखती है जिसमें धोखाधड़ी से जुड़ी पहचान की गई संपत्तियां रखी जाती हैं, ताकि बार-बार धोखाधड़ी करने वालों को चिन्हित कर सके। इसके अतिरिक्त, व्हाट्सएप नई सुरक्षा तकनीकों पर लगातार काम कर रहा है, जैसे संदिग्ध पहली बार संदेश भेजने वालों को चेतावनी देना और खाते की उम्र दिखाने की व्यवस्था।

    यह प्रयास निश्चित रूप से तकनीकी और सरकारी प्रयासों के संयोजन से डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित करेगा।

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