‘ग्लोरी’ के अंदर: दिव्येन्दु, पुलकित सम्राट और करण अंशुमान द्वारा नेटफ्लिक्स की क्रूर बॉक्सिंग-थ्रिलर के निर्माण पर चर्चा

Rashtrabaan

    नेटफ्लिक्स की नई बॉक्सिंग-थ्रिलर फिल्म ‘ग्लोरी’ ने हाल ही में दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से खासा ध्यान आकर्षित किया है। इस फिल्म में दिव्येन्दु शर्मा और पुलकित सम्राट की जबरदस्त अदाकारी को देखकर ऐसा लगता है कि वे अपनी भूमिकाओं में पूरी तरह डूब गए हैं। फिल्म के लेखक-निर्देशक करण अंशुमान ने इस प्रोजेक्ट को लेकर विशेष उत्साह प्रकट किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने बॉक्सर्स की कहानी क्यों बताने का फैसला किया।

    दिव्येन्दु और पुलकित सम्राट ने इस फिल्म में हरियाणवी लहजे को बिलकुल सटीक तरीके से पेश करने के लिए काफी मेहनत की। दोनों ने इस क्षेत्र की भाषा और बोलचाल के अंदाज को समझने में कई दिन लगाए ताकि वे अपने किरदारों को यथासंभव वास्तविक और विश्वसनीय बना सकें। पुलकित ने कहा, “हमने अपने सीमांत उच्चारण को पकड़ने के लिए कई भाषाई विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। ये हमारे लिए एक नया अनुभव था, लेकिन हमने पूरी लगन से काम किया।”

    करण अंशुमान ने बताया कि ‘ग्लोरी’ की कहानी लिखते समय उनका मुख्य उद्देश्य उन खिलाड़ियों की कहानी को सामने लाना था जो अक्सर अपनी जंग के बाहर के संघर्षों से ज्यादा ध्यान नहीं पाते। उन्होंने कहा, “यह कहानी सिर्फ एक खेल की नहीं है, बल्कि यह उन तमाम अंदरूनी जद्दोजहदों की है जो बॉक्सर्स अपनी जिंदगी में झेलते हैं। ये कहानियां दर्शकों को प्रेरित करने वाली हैं।”

    फिल्म की शूटिंग के दौरान भी टीम ने बहुत प्रतिबद्धता दिखाई। दिव्येन्दु ने बताया कि वे अपनी भूमिका में विश्वास बनाने के लिए कई बॉक्सिंग कक्षाओं में भाग लिए और अपने शरीर को पूरी तरह से तैयार किया। पुलकित सम्राट ने भी अपनी फिटनेस और तकनीक को निखारने के लिए कड़ी मेहनत की। करण अंशुमान ने उनकी मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि हर कलाकार ने अपनी भूमिका को दर्जनों बार समझने और परखने की कोशिश की।

    ‘ग्लोरी’ एक ऐसी फिल्म है जो न केवल दर्शकों को रोचक और भावुक कहानी से जोड़ती है, बल्कि भारतीय सिनेमा में गरीब और संघर्षशील पात्रों की जटिलताओं को भी उजागर करती है। दशकों से परदे पर आम तौर पर चमक-धमक के पात्रों को दिखाया जाता रहा है जबकि यह फिल्म अपने सच्चे और कच्चे अनुभवों से जुड़ी है।

    अंत में, दिव्येन्दु, पुलकित सम्राट और करण अंशुमान की यह कोशिश और मेहनत ‘ग्लोरी’ को एक यादगार अनुभव बनाती है। यह फिल्म भारतीय बॉक्सिंग के अलग पहलू को उजागर करती है और दर्शाती है कि संघर्ष की असल भावना क्या होती है।

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