मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक गतिशील किसान आंदोलन ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। जहाँ पहले सड़कें खाली और शांत रहती थीं, वहीं अब हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ किसान अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होकर सड़कों पर उतर चुके हैं। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि किसानों की लंबी और संगठित लड़ाई का संकेत है जो यहां के सामाजिक और आर्थिक स्थिति को गहराई से प्रभावित कर रहा है।
किसानों ने अपने साथ राशन, तंबू, बिस्तर और आवश्यक वस्तुएं लेकर पूरी तैयारी के साथ इस आंदोलन को शुरू किया है। यह साफ जाहिर करता है कि ये किसान अल्पकालीन प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों के लिए अनिश्चितकालीन संघर्ष करने को तैयार हैं। उनके ट्रैक्टर-ट्रॉली में जरूरी सामानों के साथ कूलर-पंखे तक मौजूद हैं ताकि गर्मी में भी उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
शहर को घेरने वाले हजारों ट्रैक्टर
हरदा जिले के सभी प्रमुख मार्गों जैसे इंदौर रोड, हनुमान मंदिर और खंडवा बाईपास तक किसानों का जमावड़ा हो चुका है। किसानों ने इन स्थानों पर अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ धरना दे रखा है, जिससे शहर में भारी जाम लग गया है और आम जनता की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस व्यापक आंदोलन ने प्रदेश भर में चर्चा और समर्थन प्राप्त किया है।
आंदोलन की तैयारी और सामरिक संगठित रूप
इस आंदोलन का विशेष पहलू यह है कि किसान न केवल प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि लंबे समय तक संघर्ष के लिए पूरी रणनीति बना चुके हैं। उनके पास जरूरी संसाधन जैसे आटा, दाल, पानी की टंकियां, तिरपाल, लकड़ी और जनरेटर मौजूद हैं। एकजुटता और पूर्ण तैयारी ने इस आंदोलन को मजबूती दी है, जो सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
समर्थन मूल्य व खरीदी की मांग पर जोर
किसानों की मुख्य मांगें ग्रीष्मकालीन फसलों के समर्थन मूल्य की सुनियोजित खरीद से जुड़ी हैं। वे चाहते हैं कि मूंग, मक्का और अन्य फसलों को सरकार उचित समर्थन मूल्य पर खरीदे, जिससे उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। लागत बढ़ती जा रही है जबकि आमदनी स्थिर या कम होती जा रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। इसीलिए वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन में मजबूती से लगे हैं।
आसपास के जिलों के किसानों का समर्थन
यह आंदोलन केवल हरदा जिले तक सीमित नहीं रह गया है। देवास, नर्मदापुरम, खंडवा और अन्य पड़ोसी जिलों से भी हजारों किसान इस आंदोलन में पूरी ताकत से जुड़े हैं। वे ट्रैक्टरों की लंबी कतार के साथ जिला मुख्यालयों तक पहुंचकर प्रशासन पर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं। इससे इस आंदोलन को प्रदेश का एक बड़ा किसान संघर्ष माना जा रहा है।
कोर कमेटी द्वारा समन्वित नेतृत्व
किसानों ने इस आंदोलन को संरचित करने के लिए बारह सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी आंदोलन के सभी बड़े निर्णयों को तय करती है और सुनिश्चित करती है कि सभी किसान एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ें। कोर कमेटी के गठन से आंदोलन को निर्णायक दिशा मिली है जिससे सरकार के साथ वार्ता की प्रक्रिया और प्रभावी हो सकेगा।
यह किसान आंदोलन उनके अधिकारों की लड़ाई है जो उनके जीवन और भविष्य से जुड़ी है। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक ये किसान डटे रहने का संकल्प लेकर मैदान में हैं। हरदा का यह आंदोलन मध्य प्रदेश में किसानों की हिस्सेदारी और आवाज का एक मजबूत उदाहरण बन चुका है।

