धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा के साथ जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत संध्या काल में किया जाता है और इसकी पूजा अर्चना का विशेष समय निर्धारित होता है।
पूजा अर्चना के बाद दान का भी विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत के दिन मंदिर में या किसी जरुरतमंद को अन्न और धन का दान करना अनिवार्य माना जाता है। यह दान मनुष्य के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। मई माह के शुरुआत में ही प्रदोष व्रत की तिथि निर्धारित हो चुकी है, आइए जानते हैं इस महीने में कब-कब प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं।
मई में प्रदोष व्रत की तिथियां
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत होता है। मई माह में पहला प्रदोष व्रत 14 मई को और दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई को होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
14 मई को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 11:20 बजे से शुरू हो कर 15 मई की सुबह 8:31 बजे समाप्त होगी। हालांकि, प्रदोष व्रत के पूजा का समय शाम 7:04 बजे से रात 9:09 बजे तक रहेगा।
दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई को है। इसकी तिथि 28 मई को सुबह 7:56 बजे से शुरू होकर 29 मई को सुबह 9:50 बजे समाप्त होगी। इस दिन पूजा का समय शाम 7:12 बजे से रात 9:15 बजे तक निर्धारित है।
प्रदोष व्रत के नियम और उपाय
- प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
- इस दिन सात्विक भोजन करें और लहसुन, प्याज, मांस तथा मदिरा का सेवन पूरी तरह से न करें।
- प्रदोष व्रत के दिन किसी भी प्रकार का विवाद, झगड़ा या लड़ाई से दूर रहें और मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना न रखें।
- घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का ध्यान रखें तथा काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
- पूजा के दौरान शिवजी की कथा और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें।
- दान-पुण्य का विशेष महत्व है। मंदिर में या जरुरतमंद के बीच अन्न और धन का दान करने से जीवन में समृद्धि और सुख-शांति की वृद्धि होती है।
नोट- यहाँ दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। MP Breaking News इसकी शुद्धता और पूर्णता की गारंटी नहीं देता।

