तमिलनाडु में 18 दिन चले जाने वाला त्योहार जहां हजारों ट्रांसजेंडर महिलाएं इकट्ठा होती हैं

Rashtrabaan

    तमिलनाडु में हर साल मनाया जाने वाला 18 दिन का कूवागम त्योहार अपनी सांस्कृतिक विविधता के कारण देश-विदेश में बेहद प्रसिद्ध है। यह उत्सव खासतौर पर ट्रांसजेंडर महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक आयोजन के रूप में देखा जाता है। हजारों ट्रांसजेंडर महिलाएं, जिन्हें क्षेत्रीय भाषा में ‘अरावणी’ कहा जाता है, इस दौरान तमिलनाडु के छोटे शहर कूवागम में इकट्ठा होती हैं।

    इस त्योहार की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, लेकिन उत्सव का चरमोत्कर्ष 16वें दिन होता है, जब सबसे भव्य सांस्कृतिक और धार्मिक रस्में संपन्न होती हैं। यह आयोजन पारंपरिक रूप से भगवान अरवान की वध और उनकी शादी की याद में मनाया जाता है। धार्मिक संकल्पना के अनुसार, अरवान भगवान ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन के लिए स्वयं को बलिदान कर दिया था, और ट्रांसजेंडर महिलाएं इस प्रतीकात्मक विवाह समारोह के माध्यम से अपनी अस्मिता और सामाजिक स्थान का जश्न मनाती हैं।

    त्योहार के दौरान, अरावणियाँ विशेष पोशाक और आभूषण पहनकर प्रभु अरवन की मूर्ति के साथ नृत्य करती हैं, और उनकी पूजा-अर्चना करती हैं। 15वें दिन को मूर्ति पर फूलों का मुकुट लगाया जाता है, जो उसकी दिव्य शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इसके बाद, 16वें दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और और प्रमुख रूप से मिठाई वितरण तथा पारंपरिक थाली (सिंदूर झूलने) की रस्म का आयोजन होता है। यह थाली समारोह अरावणियों के लिए विवाह के समान सम्मान की मुद्रा है।

    कूवागम का यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक अधिकारों और उनके सम्मान की आवाज भी बनता है। यह आयोजन समुदाय के सदस्यों को आपसी समर्थन, आत्मसम्मान और जीवन के प्रति उत्साह प्रदान करता है। सामाजिक दृष्टिकोण से यह सांस्कृतिक पर्व समावेशन और समझदारी को बढ़ावा देता है।

    त्योहार की धूमधाम में हजारों ट्रांसजेंडर महिलाएं हिस्सा लेती हैं, जो देश के विभिन्न हिस्सों से विशेष रूप से यहां आती हैं। ट्रेन और बस सेवा के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग कूवागम पहुंचते हैं, जो उत्सव के दौरान अपनी स्वतंत्र पहचान को मान्यता देने का उत्साह दिखाते हैं।

    यह पारंपरिक और धार्मिक पर्व तमिलनाडु के सांस्कृतिक इतिहास और सामाजिक बदलावों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। आने वाले वर्षों में भी यह उत्सव ट्रांसजेंडर समुदाय की गरिमा और अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता रहेगा।

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