पश्चिम बंगाल में चुनाव के दूसरे चरण के दौरान एक वायरल वीडियो ने राजनीतिक हिंसा की गंभीर तस्वीर सामने ला दी है। इस वीडियो में एक संकीर्ण गली में केंद्रीय सुरक्षा बल मौजूद थे, लेकिन वे हिंसा को रोकने में असमर्थ दिखे या शायद कार्रवाई करने से बच रहे थे। वीडियो में कुछ पुरुष भीड़ पर हाथापाई कर रहे थे, जिनमें से कम से कम दो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह झड़प भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई थी। हिंसा नोआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 120 के पास हुई, जो उत्तर 24 परगना जिले में स्थित है। वीडियो में चार सेकंड के आस-पास एक व्यक्ति को नीले टी-शर्ट पहने व्यक्ति को पीटते देखा गया, जो मनस दय नाम के भाजपा पदाधिकारी हैं। सितंबर 2025 में उन्हें भाजपा की ब barrackpore संगठन समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने दावा किया कि वे चुनाव को बाधित करने वाले विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश कर रहे थे।
यह घटना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत देती है। सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच केंद्रीय बलों की निष्क्रियता पर सवाल उठना तय है। चुनावों के दौरान ऐसी हिंसा न केवल लोकतंत्र के लिये खतरनाक है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।
चुनाव आयोग और अन्य संबंधित संस्थाओं को इस घटना की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों को कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाना चाहिए। साथ ही, सभी राजनीतिक दलों को शांति और संवैधानिक तरीके से चुनाव लड़ने का संकल्प लेना होगा, जिससे इस प्रकार की हिंसा की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
यह वीडियो सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफार्मों पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पश्चिम बंगाल की चुनावी हिंसा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों की भूमिका का व्यापक स्तर पर विश्लेषण और समीक्षा आवश्यक दिखती है ताकि आम चुनावों की गरिमा बनी रहे और हर नागरिक को सुरक्षित मतदान का अधिकार मिल सके।

