कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ शब्दों में कहा है कि फिलहाल राज्य में मुख्यमंत्री बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पार्टी में लंबे समय से यह चर्चा जारी थी कि जल्द ही कर्नाटक की सरकार में बड़ा बदलाव हो सकता है, लेकिन खरगे के बयान ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी बेहतर नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए समय आने पर उचित निर्णय लेगी।
कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद गर्माया हुआ था। कई विधायक और नेताओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच तनाव की खबरें लगातार आ रही थीं। कुछ सुत्रों का कहना था कि 4 मई को होने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजे विधानसभा में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत दे सकते हैं। लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रकार की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय राज्य और केंद्र के वरिष्ठ नेताओं की सहमति से ही लिया जाएगा।
मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों से कहा, “हम राज्य की वर्तमान स्थिति को बहुत ध्यान से देख रहे हैं और कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए समर्पित है। मुख्यमंत्री पद में कोई हड़बड़ी नहीं होगी। अगर जरूरी समझा गया तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता इस विषय पर विचार करेंगे।”
कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि डीके शिवकुमार ने हाल ही में दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की थी, जिसके बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा और सरकार अपने निर्धारित कार्यकाल तक कार्य करेगी।
क्या सिद्धारमैया पूरा करेंगे अपना कार्यकाल?
अभी भी कुछ गुट मुख्यमंत्री बदलाव की मांग पर बने हुए हैं। करीब 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद दो प्रमुख नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष के कारण सरकार में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। खासकर सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट के बीच खींचतान बनी हुई है। दो वर्षों से चल रहे रोटेशन फॉर्मूले को लेकर हाल ही में फिर से बहस हुई, जिसमें एक प्रस्ताव था कि दो से ढाई साल के बाद मुख्यमंत्री बदला जाए। लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया।
अब यह सवाल उठता है कि अगर पार्टी नेतृत्व ने भविष्य में कोई बदलाव किया तो क्या सिद्धारमैया अपना बाकी बचा हुआ कार्यकाल पूरा कर पाएंगे? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर परिवर्तन हुआ तो पार्टी की स्थिरता पर निश्चित रूप से प्रश्न उठेंगे।
वर्तमान में सरकार अपने मध्य कार्यकाल में प्रवेश कर रही है। इस समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि डीके शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर अंतिम निर्णय हो। यह विवाद कांग्रेस के अंदर नेतृत्व के भीतर गतिरोध को दर्शाता है। हालांकि मल्लिकार्जुन खरगे के स्पष्ट बयान से पार्टी में फिलहाल शीर्ष नेतृत्व को लेकर स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।

