राजस्थान एसीबी ने कृषि अधिकारी को 8 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया

Rashtrabaan

    जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने बारां जिले में कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक आनंदीलाल मीना को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। अधिकारी पर 8,000 रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है, जिसे एसीबी ने सुनियोजित जाल बिछाकर रंगे हाथों पकड़ा। यह कार्रवाई कई शिकायतों के बाद की गई है, जो कृषि विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाती है।

    एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की शुरूआत 4 मई को दो शिकायतकर्ताओं द्वारा लिखित शिकायत के आधार पर हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अधिकारी ने उर्वरक, बीज और कीटनाशक जैसे कृषि सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं से 5,000 रुपए रिश्वत की मांग की थी। यह रिश्वत स्टॉक रजिस्टर के सत्यापन के बहाने मांगी जा रही थी, जो व्यवसाय संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    शिकायत को संज्ञान में लेते हुए एसीबी ने 5 मई को गोपनीय सत्यापन की कार्रवाई शुरू की, जिसमें जांचकर्ताओं को आरोप सही पाए। जांच में यह पुष्टि हुई कि आरोपी ने पहले ही एक शिकायतकर्ता से 2,000 रुपए आंशिक रूप से ले लिए थे और शेष 3,000 रुपए की मांग कर रहा था।

    इस मामले में एसीबी कोटा रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक ओमप्रकाश मीना के निर्देशन में कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कालू राम वर्मा ने अभियान का नेतृत्व किया, जबकि उप पुलिस अधीक्षक प्रेमचंद की टीम ने आरोपित को पकड़ने में सहयोग दिया।

    एसीबी ने अधिकारी को दो अलग-अलग शिकायतकर्ताओं से क्रमशः 5,000 और 3,000 रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    जांच अभी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस भ्रष्टाचार में और लोग तो शामिल नहीं हैं या यदि जिले के अन्य विक्रेताओं से भी इसी तरह की रिश्वत वसूली की गई है।

    इस घटना का संज्ञान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमाला सहित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया गया है और वे इस जांच की निगरानी कर रहे हैं।

    यह गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार पर न तो कोई समझौता किया जाएगा और न ही ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त किया जाएगा। एसीबी की सतत कोशिश है कि राज्य में ईमानदारी और न्याय की स्थापना हो। इस प्रकार के कठोर कदम भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए आवश्यक हैं।

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