मुंबई। महाराष्ट्र में भाषा को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को नई दिशा दे दी है। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले के बाद भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़े नाम जैसे प्रताप सरनाईक, रामदास आठवले और आशीष शेलार शामिल होंगे। इस समारोह में ये सभी नेता स्वेच्छा से यह वचन देंगे कि वे अगले छह महीने के अंदर अपनी मराठी भाषा की क्षमता को बेहतर बनाएंगे।
भाजपा के हाजी अराफात शेख ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यूपी के कई लोग मराठी बोलेंगे ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि महाराष्ट्र में भाषा के मुद्दे पर कोई भी बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है; यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है तो उससे कानून, पुलिस, प्रशासन और सरकार मिलकर निपटेगी।
हाजी अराफात ने स्पष्ट किया कि वे किसी गलत व्यक्ति का समर्थन नहीं करते, चाहे वह किसी भी देश का नागरिक हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई बांग्लादेशी या पाकिस्तानी व्यक्ति गैरकानूनी रूप से रिक्शा चलाता है तो उनका समर्थन नहीं किया जाएगा और ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर हुतात्मा चौक पर मीडिया से बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि मातृभाषा पर गर्व करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा या भेदभाव किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में रहने वाले सभी लोगों को स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए और भाषाई गौरव के नाम पर किसी भी तरह के डराने-धमकाने के प्रयास को सख्ती से रोका जाएगा।
राज्य सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया है, हालांकि इस फैसले का रिक्शा यूनियनों और अन्य संबंधित संगठनों ने विरोध किया। विरोध के कारण सरकार को अनुपालन की समय सीमा अगस्त तक बढ़ानी पड़ी है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं कि कोई ऐसा कैसे सोच सकता है कि वह मराठी बोलने से इंकार कर सकता है। उन्होंने सरकार की नरमी की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द कर दिए जाने चाहिए ताकि भाषा के प्रति सभी की प्रतिबद्धता सुनिश्चित हो सके।
इस विवाद ने महाराष्ट्र में भाषा की पहचान और उसकी राजनीति को फिर से उभार दिया है, जहां स्थानीय भाषा को लेकर गहरे भावनात्मक और पहचान के संबंध जुड़े हुए हैं। सरकार का मकसद स्पष्ट है कि मराठी भाषा की गरिमा बनाए रखते हुए नियमों का पालन करवाया जाए, जिससे सामाजिक सद्भाव और कानून का राज दोनों कायम रहें।

