केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान चिंता को कम करने में नाकाम रही: भूपेश बघेल

Rashtrabaan

    रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आर्थिक संयम बरतने की अपील ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सिलसिले में भाजपा और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आर्थिक स्थिति और सोने की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की नाकामी को उजागर किया है।

    भूपेश बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री आखिरकार आर्थिक संकट को मानने को मजबूर हुए हैं, पर यह जागरूकता काफी देरी से आई है। उन्होंने याद दिलाया कि सोने की कीमतें 1.5 लाख रुपए से बढ़कर 1.86 लाख रुपए तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन इस दौरान प्रधानमंत्री और उनकी सरकार चुप थे।

    इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के वक्त चिंता दूर करने में विफल रहने का आरोप लगाया। बघेल बोले, “जब पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा था, तब वे चुप थे, अब चुनाव खत्म होने के बाद अचानक बोलने लगे हैं।”

    उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने बार-बार देश की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के प्रति सरकार को सचेत किया, लेकिन भाजपा ने इसे नजरअंदाज कर जनता को भ्रमित किया। बघेल ने कहा, “जब विपक्ष सरकार को चेतावनी दे रहा था, तब प्रधानमंत्री और भाजपा के नेता कहते थे कि हम जनता को गुमराह नहीं कर रहे बल्कि विपक्ष कर रहा है।”

    भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं से माफी मांगने की भी मांग की और कहा कि अब जब प्रधानमंत्री ने आर्थिक स्थिति की गंभीरता स्वीकार कर ली है, तो भाजपा के सभी नेताओं को देश से माफी मांगनी चाहिए।

    आर्थिक हालात को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस मौजूदा संकट के लिए प्रधानमंत्री स्वयं जिम्मेदार हैं। ऐसे में सरकार को ठोस उपाय करना चाहिए ताकि आम जनता का जीवन प्रभावित न हो।

    साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विपक्षी एकता पर टिप्पणी के जवाब में कहा कि ममता बनर्जी ने बहुत जल्दी भाजपा से दोस्ती का एहसास किया, जबकि भाजपा वहां सक्रिय नहीं थी। उन्होंने कहा, “आप खुद कह चुकी थीं कि भाजपा हमारी स्वाभाविक मित्र है और आज जब चुनाव परिणाम आ चुके हैं, तो आपको एहसास हो रहा है।”

    इस तरह भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और भाजपा पर आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर कड़ी टिप्पणी की है और आम जनता के हितों की रक्षा की पुकार लगाई है। यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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