नोएडा में 13 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शन के मामले में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने बड़े कदम उठाए हैं। इस मामले की गहन जांच के बाद दो आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई स्थानीय प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाई गई कड़ी पहल का हिस्सा है।
पुलिस के अनुसार, एनएसए के तहत जिन दो आरोपियों सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वे मजदूर संगठन ‘बिगुल दस्ता’ के सक्रिय सदस्य हैं। जांच में पता चला है कि इन दोनों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों का उपयोग कर बड़ी संख्या में लोगों को हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया। इनके कारण प्रदर्शन का स्वरूप शांतिपूर्ण से हिंसात्मक रूप में परिवर्तित हो गया, जिसमें आगजनी, तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामने आईं।
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान हुई अराजकता की घटनाओं से निपटने के लिए जिले के विभिन्न थानों में कुछ मुकदमे दर्ज किए गए थे। तकनीकी और फोरेंसिक जांच से यह सुनिश्चित हुआ कि सत्यम वर्मा और आकृति लगातार लोगों को भड़काने और प्रशासन के कामकाज में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे। इन सब तथ्यों के आधार पर पुलिस ने एनएसए के तहत इन पर कार्यवाही की।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। आगजनी और हिंसा के कारण स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा जोखिम में आ गई थी। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य संदिग्धों की भी पहचान हो चुकी है और उनकी गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी व्यक्ति या समूह जो कानून व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास करेगा, उसके खिलाफ सख्त और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अफवाह फैलाने एवं अराजकता भड़काने वाले असामाजिक तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने आम जनता से भी सहयोग करने की अपील की है ताकि जिले में शांति और सुरक्षा बनी रहे।
इस बड़ी कार्रवाई से नोएडा सहित समूचे गौतमबुद्धनगर जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस प्रशासन ने अपने संकल्प को दोहराया है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा।

